Ravish Kumar vs Godi media
Ravish Kumar vs Godi media

Ravish Kumar vs Godi media

क्यों हर शाम तमाम न्यूज चैनलों के प्राइम टाइप का टॉपिक एक समान होता है और रवीश कुमार के प्राइम टाइम का टॉपिक बिल्कुल ही अलग? क्यों देश के हुक्मरान रवीश कुमार को नापसंद करते और दूसरे पत्रकारों के साथ सेल्फी खिंचवाते हैं? क्यों रवीश कुमार को लोकतंत्र का आवाज कहा जाता है और बड़े न्यूज चैनले के एंकर्स को सत्ता की आवाजा?

इन सभी ‘क्यों’ का जवाब है पत्रकारिता के धर्म में जिसका पालन रवीश कुमार हर कीमत पर करते हैं। रवीश कुमार उस पत्रकारिता को जीवित रखे हुए है जिसके लिए गणेश शंकर विद्यार्थी शहीद हो गएं।

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क्या सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते हुए मौत को गले लगाने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी ने कभी सोचा होगा कि भविष्य में सांप्रदायिकता फैलाना ही पत्रकारिता होगी।

रवीश कुमार हर रोज ये कोशिश करते हैं कि जनता के सरोकार की बात हो। सर्वहार की बात है, किसान, मजदूर, दलित, महिला, आदिवासी कि बात करते हैं। रवीश भारत के इक्लौते ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने विश्वविद्यालय, रोजगार, बैंक, रेलवे पर सीरीज चलायी।

Ravish Kumar vs Godi media

एनडीटीवी के प्राइम टाइम की वजह से कई युवाओं को रोजगार मिला, बैंको हालत सही हुई, विश्विद्यालयों में आंदोलन हुए, कुछ परीक्षाएं समय पर होने लगी, कुछ ट्रेंन समय पर चलने लगे। इतना करने के बाद भी कुछ असमाजिक मीडिया संस्थान के पत्रकार रवीश को देशद्रोही और खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं।

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हर शाम न्यूज चैनल के स्टूडियो से अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले गोदी पत्रकार खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं। अगर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगलना राष्ट्रवाद है, गरीब जनता के खिलाफ कारपोरेट लूट को बढ़ावा देना राष्ट्रवाद है, सत्ताधारियों के तलवे चाटना राष्ट्रवाद है तो ऐसे राष्ट्रवाद को लानत है।

और हां गोदी मीडिया को ये भ्रम दूर कर लेना चाहिए कि वो राष्ट्रवादी है, दरअसल नफरत फैलाने वाले ये दलाल राष्ट्रवादी नहीं भक्त हैं।

Source: www.boltaup.com