Bhagwa Terrorism

महाराष्ट्र के पुना शहर मे जब शिवसेना का पहला राज्यव्यापी अधिवेशन सम्पन्न हुआ तब उस अधिवेशन मे मार्गदर्शन करते हुए पुना के रहने वाले देशपांडे नाम के ब्राहम्ण व्यक्ति ने कार्यकर्ताओं को एक लाईन मे समझाया कि,

“हिंदुओं कि जाग्रति प्रतिक्रिया से होती है”

उसने यह आधा ही वाक्य बताया मगर वह प्रतिक्रिया कहाँ करनी है, यह बात उसने जाहिर तौर पर नहीं बतायी। क्योंकि उसने अपने कार्यकर्ताओं को एकांत मे समझाया होगा कि हिंदुओं कि जाग्रति प्रतिक्रिया से होती है, इसलिए वह प्रतिक्रिया मुसलमानों मे करनी होगी।क्योंकि यह बात जाहिर रूप से बताना संभव नहीं है। यदि लोगों को हिंदु बनाना है तो मुसलमानों मे प्रतिक्रिया (Reaction) निर्माण करो ,लोग प्रतिक्रियास्वरूप हिंदू बनेगें, अन्यथा भारत मे कोई हिंदू नहीं है। ब्राहम्ण भी हिंदू नहीं है। राजपूत, मराठा, चमार, महार ओबीसी इनमें से कोई हिंदु नहीं है। उल्टा यह प्रतिक्रियास्वरूप हिंदु नहीं है।

आप किराना कि दुकान मे जाओ और दुकान मालिक से दो किलो किराना मांगों तो दुकान मालिक यह कहेगा कि यह दुकान निश्चित रूप से किराना की है, मगर यहां पर किराना नाम कि कोई चीज नहीं मिलती है।

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बिलकुल इसी तरह भारत मे जो हिंदू नाम का दुकान है। उस दुकान मे ब्राहम्ण है, राजपूत है, बनिया है, मराठा है, तेली हैं, तंबोली है, कूर्म है, माली है महार है, चमार है, लोहार है, कोली, एनटी, डिएनटी, वीजेएनटी के लोग मिलेंगे। मगर हिंदू कोई नहीं मिलेगा। लोगों को हिंदू बनाने का विधि है। प्रतिक्रिया(Reaction) निर्माण करने के लिए फसाद करवाओ। जितने ज्यादा फसाद होगें उतने हीन देश मे हिंदू निर्माण होगें। जितने मुसलमान देश मे मारे जाएंगे उतने ही हिंदू निर्माण होगें। मुसलमानों का जितना ज्यादा कत्लेआम होगा उतनी ही हिंदुओं कि संख्या बढेगी।इसलिए फसाद यह लोगों को हिंदू बनाने का एक बहुत बडा कार्यक्रम है।

जब ब्राहम्ण धर्म का नेता बना है तब वह तुरंत चुनाव लडता है।

अलपसंख्यक ब्राहम्ण बहुसंख्य बहुजनों को हिंदू बनाते हैं तब वे जैसे ही हिंदू बनते हैं वैसे ही धार्मिक होते हैं और धार्मिक बनते ही धर्म का नेता ब्राहम्ण बनता है। ब्राह्मण पिछले हजारों सालों से धर्म का नेता बना और आज भी बनता है। जब ब्राहम्ण धर्म का नेता बना है तब वह तुरंत चुनाव लडता है। ब्राह्मणों कि जनसंख्या 3% है। किंतु नेता बनते ही अलपसंख्यक ब्राह्मण बहुसंख्यक मे परिवर्तित होता है। हिन्दू के नाम पर ब्राह्मण को वोट मिलते ही तीन प्रतिशत ब्राह्मण चुनाव मे विजयी होते हैं। बाद मे सांसद बनते हैं। हर जगह ऐसा ही होता है। इस प्रकार ब्राह्मण पहले सांसद बनता है और बाद मे सांसदों का बहुमत मिलते ही प्रधानमंत्री बनता है। यह बातें हमें ठीक से समझनी होगी। फसाद कभी भी फसाद करवाने के मकसद से नहीं करवाया जाता है।

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फसाद के पिछे राजनीति होती है। अल्पसंख्यक ब्राहम्णों को बहुसंख्यांक बनाकर बहुसंख्याक मूलनिवासी बहुजनों पर अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए भारत मे फसाद होते हैं। अगर यह मकसद आपके ध्यान मे आ जाये तो आप षड्यंत्र का पर्दाफाश कर सकते हैं और इसके विरोध मे लोगों को जाग्रत कर उन्हें आपस मे जोडने का कार्य कर सकते हैं। यह कोई किताबी बातें नहीं है। यह सब देश मे हो रहा है। गुजरात मे जब बीजेपी हार रही थी तब वहां फसाद करवाया गया। फसाद के बाद चुनाव हुए उसमें बीजेपी को ज्यादा सीटें आयी। भारत मे 150 चुनाव क्षैत्र ऐसे है जहां मुसलमानों कि जनसंख्या ज्यादा है वहीं पर बीजेपी के ज्यादा उम्मीदवार चुनकर आते हैं।

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चुनाव जीतने के लिए करवाए जाते हैं फसाद

जहां मुसलमानों कि जनसंख्या लगभग 25-30% इतनी है वहीं पर बीजेपी के ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मे विजयी होते हैं ऐसा क्यों ? क्योंकि वहाँ मुसलमानों मे जल्दी ही प्रतिक्रिया (Reaction) निर्माण होती है।प्रतिक्रिया निर्माण होने से हिंदु जाग्रत होता है इस प्रकार देखा जाये तो देशपांडे नामक ब्राहम्ण का सिद्धांत आखिरकार सौ फीसदी सच साबित होता है।
प्रतिक्रियास्वरूप ब्राहम्णों को अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछडे वर्ग के वोट अनुसुचित जाति, जनजाति, पिछडे वर्ग के नाम पर नहीं बल्कि हिंदू के नाम पर मिलते हैं।

पेज न. 10 – संदर्भ-मूलनिवासी मुस्लिमों की ज्वलंत समस्या, लेखक:मा०वामन मेश्राम(राष्ट्रीय अध्यक्ष, बामसेफ)

प्रकाशन:मूलनिवासी पब्लिकेशन ट्रस्ट

नीचे दिये गए विडियो पर जाकर सुनिए। भारत मे हुए सिरियल बम ब्लास्ट कि हक़ीक़त, मुंबई पुलिस के पूर्व आईजी एस एम मुशरिफ से