Opinion

भगत सिंह तो सभी चाहते हैं लेकिन पड़ोसी के घर में

Bhagat Singh Sabhi Chahate hai Lekin Padosi k Ghar me

Bhagat Singh Sabhi Chahate hai

Subscribe to our Hindi TRN

आज एक साहब ने ग़ज़ब ही कहा कि पढ़ लिख लिए हो न तो नौकरी कर लो समाज सुधारने की कोशिस भी मत करो, तीन पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी! तुमसे पहले वाली पीढ़ी की उम्मीद, तुम्हारी पीढ़ी का वर्तमान और तुमसे अगली पीढ़ी का भविष्य!

जुड़ें हिंदी TRN से

मैंने कहा साहब तीनों पीढ़ी देख लिया है, कुछ नहीं करने का तो कई बार सोचता हूँ पर देश में हो रही घटनाओं की वजह से कई बार नींद नहीं आती; सोचता हूँ कि अपना आँख बन्द करने से तो अंधेरा होगा नहीं, जहाँ तक क्षमता है संघर्ष करता जाता हूँ वरना जब हमारा यह हाल है तो अगर अभी भी कुछ नहीं किया तो अगली नस्ल का क्या होगा! हमारे समाज और इस देश का क्या होगा? किसी ना किसी को तो त्याग करना होगा! एक पीढ़ी ने वलिदान दिया तो हम आज़ाद हो पाए, अगर उन्होंने भी यही सोचा होता तो, आज भी हम अंग्रेजों के ग़ुलाम होते! समस्या यह है कि आज भी भगत सिंह तो सभी चाहते हैं पर पड़ोसी के घर में! ऐसे कैसे चलेगा? देश में जब तक शांति और आपसी भाईचारा क़ायम नहीं होता देश कभी भी तरक़्क़ी नहीं कर सकता!

ये खबर भी पढ़ें  प्रगतिशील बुद्धिजीवी चुप हैं क्‍योंकि मैं निचली जाति से हूँ? कांचा इलैया

आगे मैंने कहा अगर देश का इतिहास देखना हो तो 1925 से पहले का इतिहास देखिये 1992 और उसके बाद का नहीं! बीच में क़ायदों ने मुजरों में अपनी जवानी बर्वाद कर दीं अब मुशायरों में कर रहे हैं, तो याद रखिए, ” इक़रा पे लब्बैक कहने वाली क़ौम जब मुशायरों में झूमने लगे तो उसकी क़यादत कोई कौव्वाल ही करेगा कलाम नहीं”! और हाँ मुख़लिसों की क़यादत बड़ी मुश्किल से मिलती है, पर समस्या यह है कि आज के ज़्यादातर हमारे क़ायद वो हैं, जो ख़ुद ग़ुलाम हैं! अगर क़ायद मुख़लिस चाहिए तो उनको बनाना होगा, स्वतः ही बनने का इंतेजार नहीं करना चाहिए!

ये खबर भी पढ़ें  कन्हैया कुमार ने स्मृति ईरानी की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई, पूरे कैंपस में तालियों का सिलसिला नहीं रुका

जाते जाते हमने कहा करैला नीम पे जा के बनिस्बत अच्छा हो गया; उसने झूठ इतना बोला के सच्चा हो गया (ताहिर फ़राज़) ! पर हमारा यह मानना है कि, ”

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा

गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर
अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़
हमें यक़ीं था हमारा ही क़ुसूर निकलेगा

यक़ीं न आए तो इक बात पूछ कर देखो
जो हँस रहा है वो भी ज़ख़्मों से चूर निकलेगा

ये खबर भी पढ़ें  कन्हैया कुमार पर कीचड़ फेंकने पर भड़की भीड़,आरएसएस कार्यकर्त्ता की पिटाई

उस आस्तीन से अश्कों को पोछने वाले
उस आस्तीन से ख़ंजर ज़रूर निकलेगा
-अमीर क़ज़लबाश

(ये लेखक के अपने विचार है, लेखक एक छात्र है और सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर काम करते है।)

Share this story with your friends, the truth needs to be told.

You could follow TR News posts either via our Facebook page or by following us on Twitter or by subscribing to our E-mail updates.

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

To Top