Kleptocracy किसे कहते हैं?

अगर आप डिक्शनरी में देखें तो क्लेप्त्टोक्रेसी (Kleptocracy) का अर्थ होता है एक ऐसी शासन व्यवस्था, जिसमे चोर-गुंडे-बदमाश के गैंग्स (gangs) बतौर शासक-वर्ग विद्यमान हों। दुख की बात है की आज उत्तर प्रदेश में किसी एक राजनैतिक पार्टी, यहां तक की भाजपा का भी, शासन नही चल रहा है। यहां पर क्लेप्त्टोक्रेसी (Kleptocracy) हावी है।

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उत्तर प्रदेश मे कई सरकारें आयी और गईं, विश्वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह, राजनाथ सिंह भी ठाकुर थे–और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। राजनाथ सिंह तो भाजपा के मुख्यमंत्री थे। एनकौनटर्स (encounters) वी पी सिंह और राजनाथ सिंह के शासनकाल मे भी हुए। ठाकुरवाद फैलाने का चार्ज उपर दिये तीनो नामो पर भी लगा। पर कोई ये नही कह सकता की वी पी सिंह, वीर बहादुर सिंह या राजनाथ सिंह ने, बतौर पोलिसी ‘गुंडाराज’ या क्लेप्त्टोक्रेसी (Kleptocracy) को बढ़ावा दिया।

उत्तर प्रदेश में जातीय परिवेश से कल्याण सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री हुए। इन सब पर अपनी-अपनी जातियों के पक्ष मे काम करने के आरोप लगे। भृष्टाचार के भी आरोप लगे। लेकिन इन सब मे, किसी ने भी जाती विशेष के ‘गुंडो के राज’ यानी क्लेप्त्टोक्रेसी (Kleptocracy) को संस्थाबध नही किया।

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इस मामले में ‘योगीराज’ बेजोड़ है। उत्तर प्रदेश में पिछ्ले 30-35 सालो में कितने परिवर्तन आये। नये चेहरे उभरे। लेकिन ‘राजनीती’ की परिभाषा यही रही कि मुख्यमंत्री कोई भी हो, पोलीसी के स्तर पर, सबको साथ लेकर चले।

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पर मुख्यमंत्री योगी ने राजनीती की मर्यादा भंग कर दी। ऐसा कभी नही हुआ, कि कोई मुख्यमंत्री DM को लिख कर कहे कि अमुक मुल्ज़िम पर बलात्कार का चार्ज है, इसे रद्द करो। अमुक मुल्ज़िम पर साम्प्रदायिक दंगे फैलाने-हत्या का चार्ज है, इसे रद्द करो।

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पूर्व भाजपा सांसद ‘ठाकुर’ स्वामी चिन्मयानंद पर 2011 मे अपनी ही शिष्या से बलात्कार करने का केस शाहजहांपुर जिले मे दर्ज हुआ था। आप नीचे देख सकते हैं, उस चिट्ठी की प्रतिलिपि जो मुख्यमंत्री योगी ने शाहजहांपुर District Administration को लिखी है। इसमे साफ-साफ स्वामी चिन्मयानंद पर से बलात्कार का केस हटाने की बात कही गयी है।

उन्नाव बीजेपी एमएलए रेप केस मामला

उन्नाव का ताजा केस ही ले लिजिये। पीड़िता जो मौर्य जाती की है, एक ऐसे दौर में जब उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हों, उन्नाव के ‘ठाकुर’ भाजपा विधायक (MLA) पर बलात्कार का चार्ज दर्ज कराने की कोशिश करती है। उसके पिता को खुले-आम विधायक के गुंडे मारते पीटते हैं। पर पुलिस गुंडो को गिरफ्तार नही करती। पिता को गिरफ्तार करती है। और फिर उन्हे मारती है, जिससे उनकी जेल कस्टडी में मौत हो जाती है। फिर भी विधायक गिरफ्तार नही होता। उसका भाई सरन्डर करता है।

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ऐसा कभी नही हुआ, कि प्रदेश में उपर से नीचे तक–DGP, IG, IG (Prisons), SSP, SP, SHO सभी ठाकुर हैं। और सभी ठाकुर MLA की मदद कर रहे हों। मुख्यमंत्री योगी को सलाह है–आप राजनीती मे हैं। राजनीती करिये! खुल कर करिये! पर गुंडई मत करिये! या यों कहा जाये, गुंडई और राजनीती को मिक्स मत करिये। एक ही चीज़ हो सकती है या गुंडई या राजनीती! दोनो नही।

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री एक जातिय-अपराधी सरगने के बतौर काम करे–यह असहनीय है! जनता इसे कभी बर्दाश्त नही करेगी!! जनता क्या, उत्तर प्रदेश के ठाकुर, जिनका गौरवशाली इतिहास रहा है, जिन्होने 1857 मे अंग्रेजों से लोहा लिया, खुद यह कभी बर्दाश्त नही करेंगे।

(अमरेश मिश्रा किसान क्रान्तिदल के अध्यक्ष एंव वरिष्ठ पत्रकार हैं)