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इलाहाबाद का नाम बदलने पर योगी सरकार की तीखी आलोचना, दिग्विजय सिंह बोले- ‘BJP के बस दो ही काम, काटो फ़ीता और बदलो नाम’

Yogi Govt changed Allahabad name

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार प्रतिष्ठित स्टेशनों के नाम बदलने का काम कर रही है। यूपी के मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपध्याय रखने के बाद सरकार ने संगम नगरी ‘इलाहाबाद’का नाम बदल दिया है, अब इस शहर को ‘प्रयागराज’ के नाम से जाना जाएगा। बता दें कि 1575 में मुग़ल बादशाह अकबर ने इस शहर को बसाया था।

बीते रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कुछ संतों ने उन्हें इलाहाबाद में ये प्रस्ताव दिया था। जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। लेकिन योगी सरकार के इस फ़ैसले जनता खुश नहीं है। विपक्षी नेताओं से लेकर पत्रकारों और देश की कई मशहूर हस्तियों ने इसपर ऐतराज़ जताया है।

सोशल मीडिया पर यजर्स योगी सरकार के इस फैसले की जमकर आलोचना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि, मुग़ल अगर नहीं होते तो इलाहाबाद शहर भी नहीं होता, सिर्फ़ संगम के किनारे कुछ झुग्गी झोपड़ी में लोग रह रहे होते।

शिक्षाविद्य माजिद मज़ाज नाम के एक यूजर ने सवाल खड़ा किया है कि क्या सरकार वाराणसी का नाम बदल कर शिवनगरी कर सकती है? क्या मथुरा का नाम बदल कर कृष्णपुरी किया जाएगा? वाराणसी का सारा इतिहास शिव से है और मथुरा तो कृष्ण की नगरी है। फिर इनके नाम से ही ये शहर होना चाहिए।

Social Media reaction
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लेकिन सरकार ये नहीं करेगी, क्योंकि वाराणसी और मथुरा जैसे शब्द ख़ुद हिंदू संस्कृति का हिस्सा मालूम पड़ते हैं। इलाहाबाद का नाम सिर्फ़ इसलिए बदला गया क्योंकि इस नाम से कहीं न कहीं मुस्लिम तहज़ीब का ख़्याल आता है।

मुग़लसराय का नाम इसलिए बदला गया क्योंकि इसमें मुग़ल शब्द जुड़ा था। वे मुग़ल जो अगर नहीं होते तो इलाहाबाद शहर भी नहीं होता, सिर्फ़ संगम के किनारे कुछ झुग्गी झोपड़ी में लोग रह रहे होते।

उन्होंने कहा कि कितनी अजीब बात लगती है कि इतने बड़े ऐतिहासिक शहर ‘इलाहाबाद’ का नाम बदल दिया गया और ये कहीं डिस्कोर्स में नहीं है। इस दौर का सबसे झूठा शब्द “साझी विरासत और गंगा जमुनी तहज़ीब” है।

सोचने की बात है कि ये कितना डरपोक समाज है जो मामूली से अल्पसंख्यक समुदाय की पहचान से जुड़े हुए प्रतीकों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। इनकी तमाम सहिष्णुता की बातें झूठी और बकवास मालूम पड़ती है। इनपर सिर्फ़ दया कीजिए, ये बेहद बीमार लोग हैं।

Social Media reaction
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वहीं, पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने इलाहबाद का नाम बदलने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को गुलाम बनाया अंग्रेज़ों नें, भारत की जनता पर ज़ुल्म किया अंग्रेजों ने, भगत सिंह को फांसी पर चढ़ाया अंग्रेज़ो ने. लेकिन नाम बदले जा रहे हैं मुगलों द्वारा बनाई/ बसाई गई धरोहरों के। जो लोग इलाहबाद का नाम बदलने पर खुश हैं, जो लोग हजरतगंज का अटल चौक हो जाने पर खुश हैं, जो लोग मुगलसराय का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय होने पर खुश हैं।

इसी बीच अब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी योगी सरकार के इस फैसले पर तंज़ कसा है। उन्होंने ट्वीट किया कि, भाजपा के बस दो ही काम, काटो फ़ीता और बदलो नाम।

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