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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मोदी सरकार को लगाई लताड़, कहा- ‘टैक्स फ्रेंडली नहीं है GST, जल्द करे सुधार’

Unfriendly GST tax

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने वस्‍तु एवं सेवा कर (GST) को लेकर मोदी सरकार को जमकर लताड़ लगाते हुए कहा कि भले ही केंद्र सरकार ने जीएसटी का काफी प्रचार-प्रसार किया हो, लेकिन यह टैक्स फ्रेंडली नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को इसमें जल्द सुधार करने का निर्देश दिया है।

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जस्टिस एस.सी धर्माधिकारी और भाती डांगरे की बेंच ने एक कंपनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा जीएसटी को लोगों के हिसाब से आसान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार जरूरी कदम उठाए।

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न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से नवभारत टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अबीकोर ऐंड बेनजेल टेक्नोवेल्ड नाम की कंपनी की याचिका की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि, ‘जीएसटी जैसे टैक्स का बहुत प्रचार-प्रसार किया गया और इसे लोकप्रिय बताया गया। इन आयोजनों का कोई मतलब नहीं है। संसद का विशेष सत्र बुलाना या मंत्रिमंडल की विशेष बैठकें बुलाने का करदाताओं के लिए कोई मतलब नहीं है, अगर उन्हें वेबसाइट और पोर्टल तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित नहीं होती है। यह प्रणाली टैक्स अनुकूल नहीं है।’

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याचिकाकर्ता कफ़नी ने दावा दिया है कि गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स नेटवर्क पर वह अपनी प्रोफाइल ही एक्सेस नहीं कर पाई, जिसके चलते वह ई-वे बिल्स जनरेट नहीं कर पाई और अपना समान कहीं भेज नहीं सकी। इस पर बेंच ने कहा कि जीएसटी को लेकर इस तरह की शिकायतें याचिकाओं के रूप में कई अदालतों में दायर की गई हैं। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब करते हुए उससे अपना जवाब 16 फरवरी तक दाखिल करने को कहा है।

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कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि इस नए कानून को लागू करने वाले कम से कम अब तो जागेंगे और इसे सही तरीके से लागू करेंगे। कोर्ट ने कहा, ‘देश की छवि, सम्मान और प्रतिष्ठा बचाने के लिए यह करना जरूरी है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसी याचिकाएं कम होंगी और अदालत को इस नए टैक्स कानून को लागू करवाने के लिए नहीं कहा जाएगा।’

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी अदालत ने GST को लेकर इस तरह की सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने मोदी सरकार को यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिये हैं कि जीएसटी कर अनुकूल नहीं है। जिस कारण इसमें जल्द बदलाव किए जाए।

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