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CBI विवाद पर सूप्रीम कोर्ट ने कहा- नागेश्वर राव नहीं ले सकते कोई फैसला, संजय सिंह बोले- संविधान की धज्जियां उड़ा रही मोदी सरकार के कामों पर लगी रोक

Supreme Court on CBI row

सीबीआई में मचे घमासान के बीच दखल देने को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। शुक्रवार (26 अक्टूबर) को कांग्रेस ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के मोदी सरकार के आदेश के खिलाफ पूरे देश भर में प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने सीबीआई में जारी घमासान को राफेल सौदे से जोड़कर देशभर के सीबीआई मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि, मोदी सरकार ने सीबीआई विवाद में रातों रात अभूतपूर्ण कदम उठाते हुए राफेल सौदे की जांच कर रहे CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और पीएम मोदी के करीबी CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया। साथ ही CBI संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था।

केंद्र सरकार अपने इसी फैसले को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विरोधी दल इसे अलोकतांत्रिक बता रहे हैं क्योंकि बिना चीफ जस्टिस और विपक्षी नेताओं के सलाह के प्रधानमंत्री अकेले ऐसे फैसले नहीं ले सकते हैं।

इसी बीच सीबीआई विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। दरअसल, कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले की जांच केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को दो सप्ताह में करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी को निर्देश दिया है कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच पूरी करके 2 हफ्ते के अंदर रिपोर्ट सबमिट करें। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव अभी कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकते हैं।

बता दें कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट 12 नवंबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र की ओर से अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव अब तक लिए गए फैसलों को सीलबंद लिफाफे में खुद को सौंपेंगे।

दरअसल, आलोक वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।

Supreme Court on CBI row

गौरतलब है कि, मोदी सरकार ने बिना किसी के इजाजत के CBI संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला मोदी सरकार के फैसले पर करारा तमाचा है।

वहीं, न्यूज एजेंसी भाषा के हवाले से NBT में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा ‘‘उच्चतम न्यायालय का आदेश इस बात का सीधा संकेत है कि मोदी सरकार नियम, कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाने का जो काम कर रही थी, उस पर न्यायालय ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुये रोक लगाने का काम किया है।’’

उन्होंने कहा कि आदेश में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने और सीबीआई के प्रभारी निदेशक बनाये गये एम नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला लेने से रोकने की बात भी स्वागतयोग्य है। इससे नागेश्वर राव के माध्यम से सीबीआई के कामकाज में दखल देने की केन्द्र सरकार की कोशिश पर भी लगाम लगेगी।

सिंह ने कहा कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। इससे साफ है कि अदालत भी इस बात से इत्तेफाक रखती है कि पिछले दिनों सीबीआई में निदेशक आलोक वर्मा सहित अन्य अधिकारियों को आनन फानन में हटाया गया।

उन्होंने कहा कि वर्मा ने अदालत को बताया कि उनके पास कई अहम मामलों की जांच थी और केन्द्र सरकार जांच में बाधा उत्पन्न कर रही थी। सिंह ने आरोप लगाया कि राफेल खरीद घोटाले की जांच को दबाने और अस्थाना को बचाने के लिए वर्मा के खिलाफ कार्रवाई है।

उन्होंने कहा कि गत 12 मार्च को राफेल मामला राज्यसभा के तीनों आप सांसदों ने उठाते हुये जांच की मांग भी की थी। इसके पहले उन्होंने सीवीसी और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से भी राफेल की जांच कराने की मांग की थी।

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