‘126 से ज्यादा राफेल खरीदने थे लेकिन मोदीजी ने अपने दोस्त अंबानी के लिए 36 राफेल का सौदा कर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर दिया’- संजय सिंह

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Sanjay Singh slams PM Modi on Rafale deal
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Sanjay Singh slams PM Modi on Rafale deal

पिछले काफी समय से राफेल विमान की कीमतों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और विपक्ष के बीच छिड़ा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसी बीच, राफेल विमान सौदे को लेकर मोदी सरकार की मुश्किलें अब ओर भी बढ़ती नज़र आ रही है।

दरअसल, हाल ही में मोदी सरकार ने सूप्रीम कोर्ट में राफेल सौदे और विमान की कीमतों को लेकर जो दस्तावेज़ दाखिल किए हैं, उसमें यह स्पष्ट हो गया है कि राफेल सौदे को बदलने में केंद्र सरकार ने अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं किया।

राफेल सौदे पर सरकार ने अपने ही नियमों का पालन नहीं किया

न्यूज वेबसाइट अमर उजाला की खबर के मुताबिक, सरकार ने बुधवार (14 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने लिखित जवाब में यह बात मानी है कि राफेल सौदे को बदलने में केंद्र सरकार ने अपने ही बनाए मानकों का पालन नहीं किया। सरकार ने रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 (डीपीपी) के 11 चरणों का ब्योरा दिया है।

इन नियमों में सेना द्वारा अपनी जरूरत बताना (एसक्यूआर), रक्षा खरीद काउंसिल द्वारा इस जरूरत को स्वीकार करना (एओएन), ऑफर मंगाना, तकनीकी मूल्यांकन कमेटी (टीईसी) से मूल्यांकन कराना, फील्ड ट्रायल, स्टाफ इवैलुएशन, तकनीकी ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट, सीएफसी द्वारा सौदे के मूल्य का मोलभाव, वित्तीय अधिकारी द्वारा मंजूरी, ठेके या सप्लाई के आदेश जारी करना और अनुबंध के बाद सौदे की निगरानी शामिल हैं।

लेकिन इस सौदे में सात नियमों का पालन नहीं किया गया। सरकार का तर्क है कि चूंकि ये सारी प्रक्रिया यूपीए सरकार द्वारा पूरी कर ली गई थी, इसलिए इनके दोबारा करने की जरूरत नहीं थी।

याचिकाकर्ता राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कहना है कि जब पहला सौदा रद्द कर दिया गया, तो नए सौदे के लिए डीपीपी की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से करनी चाहिए थी। जब सरकार ने माना है कि जहाज और उसमें लगे हथियार व उपकरण वे ही हैं जो यूपीए सरकार ने मंजूर किए थे तो ऐसे में 18 जहाज भी पहले सौदे की शर्तों के मुताबिक ही खरीदे जाने चाहिए थे।

दूसरा सौदा सिर्फ 18 अतिरिक्त विमानों के लिए किया जाता। उन्होंने कहा कि नया सौदा करने की जल्दबाजी थी तो मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति (सीसीएस) की बैठक सवा साल के बाद क्यों बुलाई गई।

सरकार ने माना है कि 2010 से 2015 के बीच हमारे दुश्मनों ने 400 से ज्यादा अत्याधुनिक जहाज खरीदे। इसपर संजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा, इसके बावजूद हम केवल 36 जहाज ही क्यों खरीद रहे हैं। समय के साथ तो जरूरत बढ़नी चाहिए थी। जब वायुसेना ने 2001 में 126 विमानों की जरूरत बताई थी, तो इसे घटाकर 36 किसकी सलाह पर किया गया।

इतनी सख्त ज़रूरत के बाद भी हमें पहला राफेल अगले साल के अंत तक मिलेगा और सौदे का अंतिम विमान 2022 में। यानी सौदे की घोषणा के सात सालों बाद।

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इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी माना कि उसने ऑफसेट कांट्रैक्ट के नियम 7.2 और 8.2 बदल दिए और अब कोई विदेशी कंपनी रक्षा मंत्री को यह बताने को बाध्य नहीं है कि वह ऑफसेट ठेके किसे दे रही है। संजय सिंह ने पूछा कि ऐसे में यदि विदेशी कंपनी किसी संदेहास्पद पृष्ठभूमि के व्यक्ति को ऑफसेट का ठेका देती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी।

Sanjay Singh slams PM Modi on Rafale deal
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संजय सिंह ने मोदी सरकार पर बोला हमला- 

वहीं, AAP नेता व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार ट्वीट कर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने मोदी सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा, भारत को राफ़ेल 7 साल में मिलेगा, इससे साफ़ है सरकार ने झूठ बोला “राफ़ेल की ज़रूरत जल्दी थी इसीलिये 36 ख़रीदा”

अपने दूसरे ट्वीट में सिंह ने पीएम मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा, मोदी सरकार ने जवाब दिया हमारे दुश्मनो ने 2010 से 2015 के बीच 400 जहाज़ ख़रीदा तो फिर सवाल ये है कि मोदी जी को 126 से ज़्यादा राफ़ेल ख़रीदना था उन्होंने अपने मितर अम्बानी के लिये देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ क्यों किया? 126 की जगह सिर्फ़ 36 राफ़ेल का सौदा क्यों किया?

वहीं, सिंह ने आगे कहा, देश के महाराजा मोदी जी ने 1 या 2 नही बल्कि अपने मितर अम्बानी के लिये रक्षा ख़रीद नीति के 7 नियमों का पालन किये बग़ैर पुराना सौदा रद्द कर दिया।