Retired IAS force sugarcane manager suicide
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिना किसी तैयारी के उठाए गए ‘नोटबंदी’ जैसे कदम के साइड इफेक्ट्स देश की आम जनता को आज भी बुरी तरह भुगतने पड़ रहे हैं।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के शामली जिले का है, जहां एक गांव में एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के 10 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदलवाने के दबाव में चीनी मिल के पूर्व प्रबंधक (मैनेजर) ने कथित रूप से खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर की मौत के बाद मिले सुसाइड नोट से खुलासा हुआ है कि वो नोटबंदी के समय करोड़ो रूपये न बदलने के दबाव में था। उपनी मौत का जिम्मेदार उसने एक पूर्व आईएस को ठहराया है।

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समाचार एजेंसी भाषा के हवाले से जनता का रिपोर्टर में छपी खबर के मुताबिक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) श्लोक कुमार ने बताया कि आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के बधेव गांव में कल शाम यह घटना हुई। उन्होंने बताया कि मृतक विजय सिंह (51) ने सुसाइड नोट में अपने एक रिश्तेदार और सेवानिवृत्त आईएएस विनोद कुमार पवार पर नोटबंदी के बाद प्रचलन से बाहर हो चुके नोटों को बदलवाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

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एएसपी ने बताया कि सुसाइड नोट के मुताबिक, विजय सिंह पूर्व में सेवानिवृत्त आईएएस पवार के 50 लाख रुपये के नोटों को बदलवाने में मदद की थी। सिंह ने पवार पर अपनी मां की जमीन के एक टुकड़े को जबरन हथियाने का आरोप भी लगाया है।

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कुमार ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। खुदकुशी के लिए इस्तेमाल पिस्तौल को जब्त कर लिया गया है और सुसाइड नोट को सत्यापन के लिए हस्तलेख विशेषज्ञों को भेजा गया है। गाजियाबाद निवासी पवार मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला अधिकारी और बिजनौर में जिला अधिकारी के पद पर रह चुके हैं।

गौरतलब है कि,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से 86% नोट व्यवस्था से बाहर हो गए थे।

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