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‘3000 करोड़ की ‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी’ बनाने से तो अच्छा होता PM मोदी ‘लौह पुरुष सरदार पटेल जी’ की नीति, सिद्धांतों और विचारों पर एक संस्थान बना देते’

PM Modi inaugurates statue of unity

आज (31 अक्टूबर) देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल की 143वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल ( Vallabhbhai Patel) की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) का  गुजरात में अनावरण किया।

गौरतलब है कि, मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही सरदार पटेल के लिए सहानभूति जताने के लिए पटेल की मूर्ति बनाने का फैसला किया था। सरकार पटेल की मूर्ति को विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बताया जा रहा है, जो करीब 182 मीटर ऊंची है।

यह चीन में स्थित स्प्रिंग टेंपल की बुद्ध की प्रतिमा (153 मीटर) से भी ऊंची है और न्यूयॉर्क में स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाई 93 मीटर है।

करीब 2,989 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस मूर्ति में 70 हजार टन सीमेंट और लगभग 24000 टन स्टील, तथा 1700 टन तांबा और इतना ही कांसा लगा है।

यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रैफ्ट निर्माण का काम वास्तव में 19 दिसंबर, 2015 को शुरू हुआ था और 33 माह में इसे पूरा कर लिया गया। इसका काम बुनियादी ढांचे से जुड़ी दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को अक्टूबर 2014 में सौंपा गया था।

इसी बीच, आरजेडी नेता संजय यादव ने अपने फेसबुक पेज पर मोदी सरकार द्वारा निर्माण की गई सरदार पटेल की प्रतिमा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

Statue of Unity
Statue of Unity
PM Modi inaugurates statue of unity

संजय यादव ने लिखा- 3000 करोड़ की स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी की स्टील, तांबे और लौह की प्रतीकात्मक मूर्ति खड़ा करने से अच्छा होता लौह पुरुष सरदार पटेल जी की नीति, सिद्धांतों और विचारों पर एक ऐसा संस्थान बनाते जिसमें देश के लोकतंत्र, संविधान, एकता और अखंडता एवं आरएसएस जैसे विघटनकारी संगठनों को लेकर उनके विचारों पर अध्ययन किया जाता।

काश! मोदी जी यह मूर्ति मेक इन इंडिया के तहत भारतीय कारीगरों से बनवाते।

मूर्ति है स्टेचू ऑफ़ यूनिटी की लेकिन इसे नज़दीक से देखने के लिए आपको 500 रु ख़र्च करने पड़ेंगे। यही तो मोदी जी का व्यापारिक ख़ून है।

काश! वहाँ किसानों की ज़मीन को ना क़ब्ज़ा कर वही 3000 करोड़ रू किसानों की भलाई या 3000 करोड़ रु में किसानों के बच्चों के लिए कोई विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान खुलवाया जाता।

मूर्ति अनावरण के मौक़े पर संवैधानिक पदों पर बैठे देशभर के गुजरातियों को ही स्टेज पर बैठाकर राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया। बाक़ी मोदी जी अपने लौहपुरुष आडवाणी को भूल ही गए।

कथित राष्ट्रवादी लोग जितने की मूर्ति है अब उतना ही प्रचार पर ख़र्च करने की तैयारी करेंगे।

सच्चे भारतीय, आरएसएस विरोधी, पूर्ण सेक्युलर देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार पटेल साहब को सह्रदय नमन

जय हिंद।

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