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मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘भयानक’ और ‘डरावना’, नितीश सरकार और CBI को लगाई फटकार

Muzaffarpur shelter home case Supreme Court

पिछले दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर, छपरा, हाजीपुर के शेल्टर होम में 34 बच्चियों के साथ रेप की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली नितीश सरकार के राज में बच्चियों के साथ हुई हैवानियत शर्मनाक है।

देश भर में इस घिनोने अपराध को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने एक मंच पर आकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला और कहा कि यदि नीतीश को शर्म आ रही है तो वह दोषियों पर तुरन्त कार्रवाई करें।

muzaffarpur-rape-kand
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बता दें कि, यह पूरा मामला तब उजागर हुआ, जब टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई। 31 मई को बिहार सरकार को सौंपी गई। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कैसे इन बालिका गृह में छोटी-छोटी बच्चियों का शोषण किया जाता रहा है। TISS की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों की मेडिकल जांच में उनके शरीर के कई हिस्सों पर जलने और कटने के निशान भी मिले हैं।

Muzaffarpur shelter home case
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ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों का रोज यौन शोषण होता था। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, यौन शोषण से पहले बच्चियों को नशे की दवाइयां दी जाती थीं या फिर नशे का इंजेक्शन लगाया जाता था। बता दें कि टीआईएसएस ने 7 महीनों तक 38 जिलों के 110 संस्थानों का सर्वेक्षण किया. इस सर्वेक्षण में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शोषण की शिकार हुई सभी बच्चियां 18 साल से कम उम्र की हैं। इनमें भी ज्यादातर की उम्र 13 से 14 साल के बीच है।

Brajesh_Thakur
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बता दें कि इस मामले में सीबीआई ने ब्रजेश ठाकुर के चचेरे मामा रामानुज ठाकुर को भी गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि बालिका गृह की पीड़ित बच्चियों ने रामानुज ठाकुर के खिलाफ भी बयान दिया था। बालिका गृह के कर्मचारी और ब्रजेश ठाकुर के परिजन उसे कान्हा के नाम से जानते थे। हालांकि छापेमारी के दौरान वो और ब्रजेश ठाकुर दोनों वहां से फरार हो गए थे। लेकिन बाद में सीबीआई ने उसे समस्तीपुर जिले के वारिसनगर थाने के रोहुआ गांव से पकड़ लिया।

Supreme Court
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मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड को सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘भयानक’ और ‘डरावना’

इसी बीच, सूप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के साथ हुई हैवानियत को भयावह और डरावना करार देते हुए नितीश सरकार और सीबीआई को जमकर फटकार लगाई है।

दरअसल, बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले में सीबीआई द्वारा मामले में सौंपी गई जांच की स्टेटस रिपोर्ट को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 अक्टूबर) को बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह से यह अपराध हुआ है वह काफी ‘भयानक’ और ‘डरावना’ है।

बिहार सरकार कर क्या रही है। कोर्ट ने कहा कि मामले का मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति है। इसके साथ ही अदालत ने शेल्टर होम मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा की अब तक गिरफ्तारी न होने पर सरकार और सीबीआई से जवाब मांगा है।

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और सीबीआई से जवाब मांगते हुए पूछा है कि क्यों अभी तक पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा को गिरफ्तार नहीं किया गया है? आपको बता दें कि चंद्रशेखर वर्मा का नाम भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से जुड़ रहा था। चंद्रशेखर वर्मा इस केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के करीबी थे।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में लड़कियों से कथित यौन हिंसा और बलात्कार के आरोपों की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की रिपोर्ट में दिए गए विवरण को गुरुवार को ‘भयानक’ और ‘डरावना’ करार दिया।

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा, ‘‘यह सब क्या हो रहा है? यह तो बहुत ही भयानक है।’’

शीर्ष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा आश्रय गृह के मालिक बृजेश ठाकुर के खिलाफ की गई टिप्पणियों का भी संज्ञान लिया और उसे नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों नहीं उसे राज्य के बाहर किसी जेल में स्थानांतरित कर दिया जाए।

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बृजेश ठाकुर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और जेल में उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है।

बृजेश ठाकुर इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का पता लगाने में हुए विलंब पर बिहार सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो से सफाई मांगी है।

पीठ ने बिहार पुलिस को आदेश दिया कि पूर्व मंत्री और उनके पति के यहां से बड़ी संख्या में हथियार बरामद होने के मामले की वह जांच करे। इस आश्रय गृह कांड की वजह से मंजू वर्मा को बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

पीठ ने कहा कि इस मामले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो के दल में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाए। इस मामले में न्यायालय अब 30 अक्टूबर को आगे विचार करेगा।

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