Mumbai 50k Kisan Andolan
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नेताओं-अभिनेताओं को बाथरूम में घुसकर मीडिया कवरेज देने वाला गोदी मीडिया किसानों के इस अभूतपूर्व सम्मेलन को पूरे दिन में सिर्फ कुछ मिनट देकर कर्तव्य की इतिश्री क्यूँ कर ले रहा है ताकि कोई उन्हें किसान विरोधी ना कह दे. सोशल मीडिया के लड़ाके तो इन किसानों को महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के खिलाफ साजिश तक बता चुके हैं… भूलिए मत नेता रोटी का झूठा वादा कर सकते हैं…रोटी किसान ही आपकी थाली तक पहुंचाएगा…

Kisan andolan Maharashtra
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#किसान सड़क पर
#छात्र सड़क पर
#शिक्षक सड़क पर
#कारोबारी सड़क पर
#भाजपा को फिर वोट कौन कर रहा है?

लाखों #किसान सड़को पर क्यों?
शायद अच्छे दिन आ गए है
Thanks #modiji किसानों को रोड़ पर लाने के लिए
#किसान_अधिकार_यात्रा #किसानआंदोलन #India

#किसान जो अन्नदाता है उसी को सड़कों में उतारना पड़ रहा है
Shame shame

Farmer Protest Maharashtra
Farmer Protest Maharashtra

महाराष्ट्र में किसानों के लॉन्ग मार्च को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए नासिक से छह मार्च को ‘लॉन्ग मार्च’ पर निकले महराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से करीब 50,000 किसान रविवार को मुंबई पहुंच चुके हैं. ठाणे से होकर किसान अब मुंबई में विधान भवन पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं. सोमवार को विधानसभा घेरने की योजना है. विपक्षी दलों के साथ भाजपा नीत गठबंधन के घटक शिवसेना ने भी इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है. हालांकि सीएम देवेंद्र फड़णवीस को किसानों की इस पदयात्रा में साजिश नजर आ रही है. सीएम का कहना है कि इनमें से 95 प्रतिशत आदिवासी हैं इसलिए वे टेक्निकली किसान नहीं हैं. सीएम का यह बयान खुद में किसानों के प्रति साजिश नजर आ रहा है. क्योंकि ये किसान करीब 200 किमी का सफर कर मुंबई पहुंचे हैं.

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शिवसेना यूथ विंग के नेता आदित्य ठाकरे ने यहां किसानों से मुलाकात की. बाद में वह रैली में शामिल भी हुए. शिवसेना के अलावा कांग्रेस ने भी इस रैली का समर्थन किया है. यात्रा में शामिल किसानों का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है. इस रैली में आत्महत्या कर चुके किसानों के परिजन भी शामिल हैं. दूसरी तरफ राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगंतीवार ने कहा कि सरकार किसानों के मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों के कर्ज भी माफ किए जा रहे हैं. मुंबई के करीब बढ़ रहे इन किसानों से बातचीत करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्री गिरीश महाजन को सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया है. एआईकेएस के महासचिव अजीत नवाले ने कहा कि 180 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा की शुरुआत लगभग 12,000 किसानों के साथ हुई थी और अब यह संख्या 30,000 से ज्यादा पहुंच गई है.

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आंदोलनकारी किसान सोमवार को विधान भवन जाकर अपनी मांगें रखेंगे. हालांकि, पुलिस का कहना है कि किसानों को आजाद मैदान पर ही रोक दिया जाएगा. उधर, सोमवार को किसानों के विधानसभा घेराव को लेकर पुलिस ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है. ऑल इंडिया किसान सभा की प्रदेश परिषद के अध्यक्ष किसान गुजार ने कहा कि हम पूर्ण ऋणमाफी, उपज के उचित दाम आदि को मांग को लेकर सोमवार को विधानभवन का घेराव करेंगे. किसानों की मांग कर्जमाफी और अपनी फसल का सही दाम दिए जाने को लेकर है. साथ ही ये किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग कर रहे हैं. वन क्षेत्रों की जो जमीनें किसानों से लेकर सरकार ने अधिगृहीत कर ली है ये किसान उन्हें भी वापस दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

किसानों के इस मार्च में बड़े पैमाने पर आदिवासी भी शामिल हैं. आदिवासी किसानों की मांग है कि जिन जमीनों पर वो खेती किसानी कर रहे हैं, उसका मालिकाना हक उन्हें अब तक नहीं मिला. उन्हें उन जमीनों पर अपना हक चाहिए. किसान आदिवासी वनभूमि के आवंटन से जुड़ी समस्याओं के निपटारे की भी मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि आए  ताकि आदिवासी किसानों को उनकी ज़मीनों का मालिकाना हक मिल सके.

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Maharashtra Kisan Andolan
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किसानों की मांगें…
किसान कर्ज माफी, बिजली बिल माफी और उचित समर्थन मूल्य के साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कराना चाहते हैं.
– किसानों की सबसे बड़ी मांग है कर्जमाफी. बैंकों से लिया कर्ज किसानों के लिए बोझ बन चुका है. मौसम के बदलने से हर साल फसलें तबाह हो रही है. ऐसे में किसान चाहते हैं कि उन्हें कर्ज से मुक्ति मिले.
– संगठनों का तर्क है कि महाराष्ट्र के अधिकतर किसान फसल बर्बाद होने के कारण बिजली बिल नहीं चुका पाते हैं. इसलिए उन्हें बिजली बिल में छूट दी जाए.
– फसलों के वाजिब दाम की मांग किसान लंबे समय से कर रहे हैं. सरकार ने हाल के बजट में भी किसानों को एमएसपी का तोहफा दिया था, लेकिन कुछ संगठनों का मानना था कि केंद्र सरकार की एमएसपी की योजना महज दिखावा है.
– वो चाहते हैं कि सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें भी लागू करे.
एआईकेएस के सचिव राजू देसले ने किसान यात्रा की शुरुआत के वक्त ये भी कहा, ‘हम ये भी चाहते हैं कि राज्य सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर सुपर हाइवे तथा बुलेट ट्रेन के लिए कृषियोग्य भूमि का जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं करे.

Source: SabrangIndia