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नेहरू मेमोरियल से छेड़छाड़ कर रही है मोदी सरकार, 4 बड़े बौद्धिकों को हटाकर ‘अपने’ लोगों को बनाया संस्थान का सदस्य, अर्नब गोस्वामी भी शामिल

Modi Govt removed NMML’s four big intellectuals

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता संभालते के कुछ महिने बाद से ही दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) की कार्यप्रणाली से छेड़छाड़ की खबर सामने आती रही है, जिसे लेकर समय-समय पर गंभीर विवाद होते रहे हैं।

गौरतलब है कि, हाल ही में मोदी सरकार द्वारा NMML में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों का संग्रहालय बनाने के फैसले को लेकर काफी विवाद हुआ था। एनएमएमएल सोसायटी के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कई बार बैठक के दौरान और बाद में भी चिट्ठी लिखकर इसका विरोध किया था।

NMML
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उन्होंने यह दलील दी थी कि तीन मूर्ति भवन पंडित जवाहरलाल नेहरू की धरोहर है, उसके अंदर किसी भी तरीके का निर्माण करना ठीक नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर सरकार देश के बाकी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय बनाना चाहती है तो वह किसी दूसरी जगह पर बना सकती है।

वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए पत्र लिखकर नेहरू मेमोरियल से छेड़छाड़ न करने की अपील की थी। मनमोहन सिंह ने अपने चिट्ठी में लिखा है कि वाजपेयी सरकार के छह साल के दौरान नेहरू की स्मृतियों से कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ, लेकिन अब ऐसा होना भारत सरकार का एजेंडा लग रहा है।

उन्होंने कहा था कि एक एजेंडे के तहत NMML और तीन मूर्ति भवन की प्रकृति और चरित्र को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन विरोध के बावजूद न सरकार ने और न ही एनएमएमएल ने इसे लेकर अपनी राय बदली।

इसी बीच, एक बड़ी खबर सामने आई है कि, मोदी सरकार ने एनएमएमएल के चार बड़े बौद्धिकों को हटाकर उनकी जगह अपने लोगों को नियुक्त कर लिया है। दरअसल, केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने नोटिस जारी कर इस फैसले की जानकारी दी है कि NMML सोसायटी के चार पुराने सदस्यों को हटाकर उनकी जगह नए सदस्यों की नियुक्ति की गई है।

संस्कृति मंत्रालय के आदेश से जिन चार लोगों को हटाया गया है उनमें नितिन देसाई, डॉ बीपी सिंह, प्रताप भानु मेहता और प्रोफेसर उदयन मिश्रा शामिल हैं। इन सबकी गिनती देश के बड़े बौद्धिकों में होती है।

मोदी सरकार के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता और नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी के सदस्य जयराम रमेश ने कहा है, “जिन लोगों को हटाया गया है, वे लोग ईमानदारी की मिसाल थे।

Modi Govt removed NMML’s four big intellectuals

बता दें कि, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर के साथ मिलकर अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ की स्थापना करने वाले चैनल के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को नई दिल्ली में मौजूद नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) का नया मेंबर बनाया है।

अर्नब गोस्वामी के अलावा तीन और लोगों को इस प्रतिष्ठित संस्थान का मेंबर बनाया गया है। जिसमें पूर्व विदेश सेक्रेटरी एस. जयशंकर, बीजेपी सांसद विनय सहस्रबुद्धे और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फोर आर्ट्स के चेयरमैन व पूर्व पत्रकार राम बहादुर राय शामिल है।

अधिसूचना के मुताबिक, नए सदस्यों का कार्यकाल 26 अप्रैल, 2020 तक या अगले आदेश तक रहेगा।

दिलचस्प बात यह है कि जिन्हें हटाया गया है, वे अक्टूबर, 2016 में नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद से लिए गए कई फैसलों पर अपनी आपत्ति जताते रहे हैं। हाल ही में राजनीतिक दबाव के चलते प्रताप भानु मेहता ने इस्तीफा दे दिया था, जिसकी मंजूरी पर यह नोटिस मुहर लगाती है।

वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बर्खास्त तीन सदस्यों को खुलेआम सरकार की आलोचना करने के लिए जाना जाता था। ये तीनों ही मेंबर नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते थे। इन तीनों ही सदस्यों ने प्रधानमंत्रियों के म्यूजियम के निर्माण की आलोचना की थी और अब ऐसे में उन्हें हटा दिया गया।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार ने संस्थान में अपनी मनमर्जी चलाने के लिए यह नई नियुक्तियां की हैं और उसे अपने लोगों से भर दिया है? क्या नेहरू की विरासत को चोट पहुंचाने के लिए यह मोदी सरकार का नया कदम है?

गौरतलब है कि, विशेषज्ञ लगातार यह बताते रहे हैं कि मोदी सरकार के आने के बाद से ही नेहरू की विरासत पर हमला शुरू हो गया था और नेहरूवादी नीतियों को खत्म करने के नाम पर हर लोकतांत्रिक संस्थान को नष्ट किया जा रहा है।

 

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