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#Metoo: मोदी के मंत्री एमजे अकबर पर 6 वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने लगाया ‘यौन शोषण’ और अनुचित व्यवहार का सनसनीखेज आरोप, सरकार चुप!

Metoo campaign 6 women accuse minister M J Akbar

‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) के तहत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के ऊपर छह महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। लेकिन अकबर या मोदी  सरकार की ओर से इस बारे में अब तक कोई बयान नहीं दिया गया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बारे में पूछे गए पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया।

दरअसल, अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद से फिल्म इंडस्ट्री से ‘मी टू’ अभियान की शुरुआत हुई है। इस अभियान ने मीडिया जगत से लेकर मोदी सरकार के एक मंत्री को अपने लपेटे में ले लिया है। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर पर महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

Metoo campaign 6 women accuse minister M J Akbar
Metoo campaign 6 women accuse minister M J Akbar

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से जनता का रिपोर्टर में छपी खबर के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के ऊपर अब छह महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। आरोप में कहा गया है कि यह काम उन्होंने तब किया जब वे समाचार पत्र के संपादक के रूप में काम कर रहे थे।

सबसे पहले प्रिया रमाणी, जो पहले इंडिया टुडे, द इंडियन एक्सप्रेस और मिंट में काम कर चुकी हैं, ने एमजे अकबर पर होटल के कमरे में बुलाने का आरोप लगाया है।

रमानी ने सोमवार को एक लेख के बारे में ट्वीट किया, जिसे उन्होंने 2017 में वोग पत्रिका के लिए लिखा था।उन्होंने कहा, “मैंने अपने इस लेख की शुरुआत मेरी एमजे अकबर स्टोरी के साथ की थी। उनका नाम कभी नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ ‘किया’ नहीं था।” उन्होंने अकबर को ‘प्रेडेटर’ भी कहा।

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इसके अलावा एमजे अकबर द्वारा मुंबई में एक होटल के कमरे में बातचीत के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए स्वतंत्र पत्रकार कनिका गहलोत, जिन्होंने 1995 से 1997 तक एशियन युग और अन्य प्रकाशनों में अकबर के साथ काम किया, ने कहा कि, “मैंने रमाणी के लेख को नहीं पढ़ा था। लेकिन उन्होंने कई के साथ ऐसा किया है। मैंने अकबर के साथ तीन वर्षों तक काम किया। लेकिन शुरूआत में ही मुझे एक ने अागाह कर दिया था।”

वहीं, सुप्रिया शर्मा, जो अभी दिल्ली में द एशियन एज की रेजिडेंट एडिटर हैं, की उम्र उस समय करीब 20 साल थी। वे उस अखबार की लॉन्च टीम का हिस्सा थी, जहां उन्होंने 1993 से 1996 तक काम किया। वे अकबर को रिपोर्ट करती थीं। एक दिन वह अखबार का पेज बना रही थीं और अकबर उनके पीछे खड़े थे। शर्मा याद करते हुए बताती हैं, “उन्होंने मेरी ब्रा स्ट्रीप को खिंचा और कुछ कहा। मैं तुरंत उनके उपर चिल्लाई।” साथ ही शर्मा ने कई गंभीर आरोप लगाई हैं।

लेखिका शुमा राह ने बताया कि उन्हें एशियन एज में नौकरी के सिलसिल में एमजे अकबर के साथ एक इंटरव्यू के लिए 1995 में कोलकाता के ताज बंगाल होटल में बुलाया गया था। वे कहती हैं, “जब वे लॉबी में पहुंची, मुझे उपर आने कहा गया। मैंने ज्यादा नहीं सोचा। लेकिन इंटरव्यू के दौरान बेड पर बैठना मुझे काफी असहज लगा। अकबर ने मुझे जॉब आॅफर किया और कहा कि क्यों नहीं आप कभी मेरे साथ ड्रिंक पर आएं?” राहा ने कहा कि मैं इस टिप्पणी से डर गई अौर नौकरी नहीं ज्वाइन किया।

इसके अलावा पत्रकार प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने एमजे अकबर का नाम लिए बिना इसी तरह की एक घटना के बारे में 7 अक्टूबर को ट्वीट किया। वे कहती हैं, “एक ‘प्रख्यात’ संपादक ने मुझे ‘काम पर चर्चा’ करने के लिए होटल में बुलाया और फिर जब मैंने मना कर दिया तो पढ़ रहे मैगजीन को बेड पर रख दिया।” हालांकि सोमवार (8 अक्टूबर) को बिंद्रा ने अकबर का नाम शामिल किया। मंगलवार को अकबर के खिलाफ एक और पत्रकार सामने आईं। शतापा पॉल ने रमाणी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, “मी टू। एमजे अकबर 2010-11 कोलकाता में इंडिया टुडे में काम करने के दौरान।”

सुषमा स्वराज ने साधी चुप्पी

एमजे अकबर पर महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से सवाल किया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। वरिष्ठ पत्रकार स्मिता शर्मा ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पत्रकार सुषमा स्वराज से अकबर पर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया मांग रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी जवाब देने से इनकार कर दिया।

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