Mecca Masjid blast case verdict
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हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में सोमवार (16 अप्रैल) को 11 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला आया। जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने स्वामी असीमानंद समेत सभी पांचों आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया है। फैसला सुनाने के लिए आरोपी असीमानंद को नमापल्ली कोर्ट में लाया गया था। स्वामी असीमानंद इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक थे।

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, स्थानीय पुलिस की शुरुआती छानबीन के बाद यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया। सीबीआई ने एक आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद 2011 में सीबीआई से यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास गया। इस मामले में स्वामी असीमानंद समेत कुल 11 आरोपी हैं। जिसमें से एक की मौत हो चुकी है। एनआईए की अदालत ने पिछले सप्ताह फैसले की सुनवाई आज के लिए टाल दी थी।

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बता दें कि जुमे की नमाज के दौरान हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 58 लोग घायल हुए थे। जुमे की नमाज के दौरान ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में विस्फोट की यह घटना 18 मई 2007 को हुई थी। इस मामले में स्वामी असीमानंद समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। जुमे की नमाज के दौरान ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में विस्फोट की यह घटना 18 मई 2007 को हुई थी।

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गौरतलब है कि इस साल मार्च में खबर आई थी कि इस मामले के आरोपी स्वामी असीमानंद की डिस्क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट से गायब हो गई है। इसके बाद हड़कंप मच गया था। हालांकि एक दिन बाद दस्तावेज मिल गया था।