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‘PM मोदी असत्यवादी प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने मतदाताओं का भरोसा तोड़ा, हिंसा, लिंचिंग और गऊ-रक्षा से जुड़ी घटनाओं पर चुप रहे’- पूर्व PM मनमोहन सिंह

Manmohan Singh attacks PM Modi

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ मनमोहन सिंह ने शुक्रवार (26 अक्टूबर) को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उनका (PM मोदी) शासन भारत के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि उन्होंने मतदाताओं का भरोसा तोड़ा है और ऐसी सरकार का नेतृत्व किया है जो देश में साम्प्रदायिक हिंसा, लिंचिंग और गऊ-रक्षा से जुड़ी घटनाओं पर अक्सर चुप रही।

भाषा के हवाले से एक न्यूज वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक, मनमोहन सिंह कांग्रेस नेता शशि थरूर की पुस्तक ‘द पैराडॉक्सियल प्राइम मिनिस्टर’ के विमोचन पर बोल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के तहत देश के विश्वविद्यालयों और सीबीआई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

Release of Tharoor's book
Release of Tharoor’s book

गौरतलब है कि, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के अंदर इतिहास में पहली बार भष्टाचार और रिश्वतख़ोरी के गंभीर आरोपों को लेकर घमासान मचा हुआ है।

Manmohan Singh attacks PM Modi

बता दें कि, CBI के दो सीनियर अधिकारी एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। सीबीआई में आतंरिक कलह के मद्देनजर मोदी सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है। वहीं, सीबीआई विवाद में हस्तक्षेप को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

Manmohan Singh attacks PM Modi
Manmohan Singh attacks PM Modi

मनमोहन सिंह ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी भारत के लोगों से तमाम बड़े-बड़े दावे करके भारत के 14वें प्रधानमंत्री चुने गए लेकिन पिछले चार वर्ष में वह और उनकी सरकार मतदाताओं की आशाओं पर खरे नहीं उतरे हैं, उन्होंने मतदाताओं का यकीन तोड़ा है।

उन्होंने आगे कहा कि मोदी ‘असत्यवादी प्रधानमंत्री हैं’ और शशि थरूर ने अपनी किताब में इसे बहुत अच्छे से लिखा है। शशि थरूर की जिस पुस्तक का विमोचन किया गया है उसका नाम ‘द पैराडॉक्सियल प्राइम मिनिस्टर: नरेन्द्र मोदी एंड हिज इंडिया।’

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साथ ही उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर कथित तौर पर विदेशों में पड़ा अरबों रुपये का काला धन वापस लाने के वादे जो किए गए थे, उस दिशा में कुछ नहीं हुआ। वहीं, जल्दबाजी में नोटबंदी कर दिया गया, जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) अर्थव्यवस्था के लिए आपदा साबित हो रही है।

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