Jio university controversy
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मोदी सरकार देश से आरक्षण खत्म करने की अपनी योजना को लेकर तत्पर है। जब देश जियो यूनिवर्सिटी को लेकर मजाक बना रहा था, चुटकुले गढ़ रहा था, ठीक उसी वक्त सरकार ने खेल कर दिया।

सरकार ने Institute of Eminence बनाकर IIT- बंबई, IIT-दिल्ली और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस इन तीन सरकारी संस्थाओं को स्वायत्त बनाकर रिजर्वेशन खत्म कर दिया है।

Institute of Eminence के नियम साफ लिखा है, ये संस्थान स्वायत्त यानी ऑटोनोमस होंगे। वहां नियुक्तियों और एडमिशन में रिजर्वेशन का जिक्र तक नहीं है।

न्यूज वेबसाइट बोलता यूपी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा इस मामाले पर विस्तार से लिखा है…

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”आपकी सोच जहां तक जाती है, वहां से RSS के ब्राह्मण सोचना शुरू करते है। वे धूर्त हैं। जियो के पास यूनिवर्सिटी के नाम पर अभी दो इंट भी नहीं है। इसलिए उसे श्रेष्ठ संस्था बनाने पर हंगामा तो होना था। हंगामा हो गया।

क्या सरकार और RSS को यह मालूम नहीं था?

मैं RSS के लोगों को मूर्ख नहीं मानता। उन्हें मालूम था कि विवाद होगा। लेकिन इस विवाद की आड़ में उन्होंने एक बड़ा काम कर लिया। उन्हें मालूम था कि अगर तीन सरकारी संस्थाओं को सीधे सीधे श्रेष्ठ संस्थान बनाकर उन्हें नियुक्तियों, एडमिशन, फीस आदि के लिए स्वायत्त यानी ऑटोनोमस कर देंगे तो लोग नाराज हो जाएंगे। वैसे भी 2 अप्रैल के हंगामे का बाद देश का तापमान गर्म है।

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इसलिए श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी की लिस्ट में जियो को डाला गया। तो अब आपका ध्यान है जियो यूनिवर्सिटी पर। आप चुटकुले बनाने में लगे हैं। मजाक उड़ा रहे हैं। मैं भी यही कर रहा हूं। इस लिस्ट में जियो को शामिल करके उन्होंने आपका ध्यान भटका दिया है।

इस बीच में सरकारी पैसे से बने देश के तीन सबसे महत्वपूर्ण संस्थान नियुक्तियों, एडमिशन के मामले में सरकारी नियमों और संवैधानिक प्रावधानों से आजाद हो गए। अभी ऐसे संस्थानों की तीन महीने के अंदर लाइन लग जाएगी।

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अब सरकार धीरे से कह रही है कि जियो को दर्जा दरअसल तीन साल बाद मिलेगा, वह भी उस समय की स्थिति को देखते हुए। लेकिन इस बीच आप तो लुट गए। आपका रिजर्वेशन गया। इन सरकारी संस्थानों की नौकरियों में भी और एडमिशन में भी।

इसके अलावा बाकी दो संस्थान भी सरकार से पैसे लेंगे और रिजर्वेशन लागू नहीं करेंगे। यानी छह में से पांच संस्थानों में खेल हो गया और आपका ध्यान जियो पर लगा रहा।”