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RTI रैंकिंग: मोदी सरकार में छठे स्थान पर खिसका भारत, मनमोहन सरकार में दूसरे नंबर पर था

India sixth place in global RTI rating

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान सूचना का अधिकार (RTI) रैंकिंग में भारत की स्थिति में काफी गिरावट दर्ज की गई है। देश की रैकिंग नीचे गिरकर अब छठे नंबर पर पहुंच गई है। पिछले साल भारत पांचवें स्थान पर था।

जबकि मनमोहन सरकार में आरटीआई रैंकिंग में भारत दूसरे स्थान पर था। इससे स्पष्ट हो गया कि, मोदी राज भारत में RTI कानून पहले के मुकाबले कमजोर हुआ है। बता दें कि साल 2011 में आरटीआई पर ग्लोबल रेटिंग की शुरूआत हुई थी।

नवोदय टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकारों पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप (एआईई) और सेंटर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी (सीएलडी) ने 28 सितंबर को इंटरनेशनल राइट टू नो (जानने का अधिकार) डे के दिन द्वारा यह रिपोर्ट पेश की गई है। वैश्विक स्तर पर एक सूची तैयार करने में 150 प्वाइंट स्केल का इस्तेमाल किया जाता है।

India sixth place in global RTI rating
RTI-Ranking
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वहीं,  एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ‘दुनिया के प्रमुख 123 देशों में आरटीआई कानून है और जिन देशों को भारत से ऊपर स्थान मिला है, उनमें से ज्यादातर देशों ने भारत के बाद इस कानून को अपने यहां लागू किया हैं।’ साथ ही संस्था ने आरटीआई एक्ट से जुड़े तीन महत्वपूर्ण सेक्शन, मसलन 25 (2), सेक्शन 19 (1) और सेक्शन 19 (2) पर फोकस कर रिपोर्ट पेश की है।

RTI ranking

बता दें भारत में इस कानून को सूचना का अधिकार नाम से जानते हैं वहीं दुनिया के कई देशों में इसे ‘राइट टू नो’ के रूप में जानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया ने भारत में 12 अक्टूबर 2018 को आरटीआई दिवस के मौके पर जारी रिपोर्ट में भारत की अंतरराष्ट्रीय रैकिंग गिरने का ज़िक्र किया है।

 

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