India

IAS टॉपर ‘शाह फैसल’ के रेप की बढ़ती घटनाओं पर ट्वीट करने पर सरकार ने की कार्रवाई, IAS ने कहा- ‘लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति का गला घोंटा जा रहा है’

IAS topper Shah Faesal rapistan tweet controversy

IAS topper Shah Faesal rapistan tweet controversy

Download Our Android App Online Hindi News

2010 बैच के UPSC टॉपर फैसल ने बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक ट्वीट किया था, जिस पर उन्हें केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा नोटिस भेजा गया है। इस बात की जानकारी खुद फैसल ने ट्विटर पर नोटिस साझा करते हुए दी है। फैसल ने लिखा कि लोकतांत्रिक भारत में औपनिवेशिक भावना से बनाए नियमों के जरिये अभिव्यक्ति का गला घोंटा जा रहा है।

जुड़ें हिंदी TRN से

न्यूज वेबसाइट बोलता यूपी.कॉम की खबर के मुताबिक, फैसल ने देश में ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में बलात्कार के बढ़ते मामलों को लेकर ट्वीट किया लेकिन सरकार को ये नागवार गुजरा। फैसल ने ट्वीट में कहा था कि पितृसत्ता, अशिक्षा, पोर्न, तकनीक, शराब, अराजकता, भुखमरी के कारण साउथ एशिया रेपिस्तान बनता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, फैसल के खिलाफ केंद्र सरकार के पर्सनल एवं ट्रेनिंग विभाग की सिफारिश पर जम्मू कश्मीर जनरल प्रशासनिक विभाग (जीएडी) ने विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।

शाह फैसल को भेजे गए पत्र में जीएडी के कमिश्नर सेक्रेटरी ने कहा है कि उन्होंने भारतीय सर्विस रूल 1968 का उल्लंघन किया है। आईएएस अफसर होने के नाते फैसल ने ईमानदारी से अपनी ड्यूटी नहीं निभाई। एक जन सेवक को ऐसा टवीट् नहीं करना चाहिए। फैसल के ट्वीट का स्क्रीन शाट भी जीएडी ने उन्हें भेजा है।

ये खबर भी पढ़ें  कांग्रेस की चलाई ‘इंदिरा कैंटीन’ में खाना खाकर बीजेपी कार्यकर्ता कर रहे हैं प्रचार, मोदी जी पूछते हैं काम क्या किया है?

बोलता यूपी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, अब फैसल ने सरकार के इस रवैय्ये को अलोकतांत्रिक बताते हुए ट्वीट किया है| स्टडी लीव पर चल रहे फैसल ने जीएडी के पत्र को लव लेटर करार देकर दोबारा ट्वीट किया और उक्त पत्र को भी ट्वीटर पर डाला है।

उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि लोकतांत्रिक भारत में औपनिवेशिक कानूनों को आज़ादी को दबाने के लिए इस्तेमाल करा जा रहा है। केंद्र सरकार ने फैसल के ट्वीट को सर्विस रूल 1968 का उल्लंघन करार दिया है। फैसल के अनुसार, वह इस रूल को बदलना चाहते हैं। बस यही उनकी मंशा थी।

वहीं, द वायर से बात करते हुए फैसल ने कहा, ‘इस तरह के कदम आचार-व्यवहार के नियमों के चलते उठाए जाते हैं. पहला, जब किसी सरकारी कर्मचारी के बतौर व्यवहार न किया हो, दूसरा सरकार की नीति की आलोचना पर. अब इसका अर्थ किस तरह निकाला जा रहा है, यह इस पर निर्भर करता है. अगर हम लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी को सम्मान देने के प्रति गंभीर नहीं हैं तो किसी भी तरह के व्यवहार को सरकारी कर्मचारी के व्यवहार के उलट और सरकारी नीति की आलोचना समझा जा सकता है.’

ये खबर भी पढ़ें  कपिल सिब्बल का स्मृति ईरानी से सवाल - क्या अब मोदी को भेजेंगी चूड़ियां ?
IAS topper Shah Faesal rapistan tweet controversy

उनका कहना है कि उनका मकसद सरकारी कर्मचारियों के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी की कमी को सामने लाना है. वे कहते हैं, ‘समाज का एक बड़ा वर्ग सरकारी कर्मचारियों का है लेकिन हम आमतौर पर उसके बारे में बात नहीं करते हैं. लोग समझते हैं कि सरकार और हमारे बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट है और कर्मचारियों को उसका पालन करना है. मैं इस ट्वीट के ज़रिए ये कहने की कोशिश कर रहा हूं कि कर्मचारी भी इसी समाज से आता है. वो बड़े नैतिक मुद्दों से अलग नहीं रह सकता है. सरकारी कर्मचारी होने का मतलब ये नहीं है कि वो सार्वजनिक चीजों से अलग रहे. मेरा मानना है कि मैंने उचित सावधानी के साथ अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल किया है. मसलन मैंने कभी भी सरकारी नीति की आलोचना नहीं की है.’

ये खबर भी पढ़ें  सबलगढ़: भाजपा के मंसूबो पर फिरा पानी, चली कांग्रेस की लहर

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डीओपीटी द्वारा फैसल को नोटिस भेजने पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि ऐसा लगता है कि डीओपीटी शाह फैसल को सिविल सेवाओं से निकाल फेंकने के लिए दृढ़ है. इस पन्ने की आखिरी लाइन में फैसल की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल चौंकाने वाले हैं. एक व्यंग्यात्मक ट्वीट बेईमान कैसे हो सकता है? ये उसे किस तरह भ्रष्ट बनाता है?

Omar-Abdullah-Shah-Faisal-Tweet

Omar-Abdullah-Shah-Faisal-Tweet

You could follow TR News posts either via our Facebook page or by following us on Twitter or by subscribing to our E-mail updates.

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

To Top