31 साल बाद हाशिमपुरा नरसंहार मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया फ़ैसला, दर्जनों मुसलमानों का कत्लेआम करने वाले 16 PAC जवानों को मिली उम्रकैद की सजा

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Hashimpura massacre case verdict
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31 साल बाद हाशिमपुरा नरसंहार को लेकर आज (31 अक्टूबर) को दिल्ली हाई कोर्ट में फैसला सुना दिया। सभी 16 आरोपी PAC जवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 1987 के इस मामले में आरोपी पीएसी के 16 जवानों को 42 लोगों की हत्या और अन्य अपराधों के आरोपों से बरी करने के तीन साल पुराने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।

hashimpura murders case
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बता दें कि, 31 साल पहले 1987 में राजीव गांधी सरकार ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने का आदेश दिया था इसके बाद पश्चिम यूपी में माहौल ख़राब हुआ था। इस दौरान मेरठ जिला स्थित हाशिमपुरा में 22 मई 1987 को काफी संख्या में पीएसी के जवान पहुंचे थे।

इन जवानों ने वहां मस्जिद के सामने चल रही धार्मिक सभा से मुस्लिम समुदाय के करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया था। आरोप है कि पीएसी जवानों ने इनमें से 42 लोगों की गोली मारकर हत्या के बाद उनके शव नहर में फेंक दिए थे।

Hashimpura massacre case
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जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, 1987 हाशिमपुरा नरसंहार कांड में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सभी 16 दोषी पीएसी जवानों को दी उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पीएसी के 16 जवानों को इस केस में संदेह का लाभ देते हुए 2015 में बरी किया था, जिसके बाद पीड़ित पक्ष इस दोबारा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और उनके खिलाफ लगे आरोपों को बिना शक साबित नहीं कर पाया। 1987 में हाशिमपुरा कस्बे में हुए नरसंहार में 40 मुसलमान मारे गए थे। 1987 में मेरठ में हुए दंगे के बाद पीएसी के जवान हाशिमपुरा मुहल्ले के 40-50 मुसलमानों को कथित तौर पर अपने साथ ले गए थे।

hashimpura-killings
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खबर के मुताबिक, उत्तरप्रदेश राज्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और नरसंहार में बचे जुल्फिकार नासिर सहित कुछ निजी पक्षों की अपीलों पर हाई कोर्ट ने 6 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं, बुधवार (31 अक्टूबर) इस मामले फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी 16 जवानों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

बता दें कि, इस मामले में 19 पीएसी जवानों को हत्या, हत्या के प्रयास, सुबूतो से छेड़छाड़ और साजिश रचने की धाराओं में आरोपी बनाया गया था। साल 2006 में 17 लोगों पर आरोप तय किए गए, सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई थी।