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BJP शासित गुजरात में लूंगी पहनने के चलते बिहार के सात लोगों पर हमला, तीन गिरफ्तार

Gujarat attacked for wearing lungi

28 सितंबर, 2018 को बीजेपी शासित गुजरात के साबरकांठा जिले में 14 महीने की एक बच्ची के साथ बलात्कार के आरोप में बिहार के एक श्रमिक की गिरफ्तारी के बाद गुजरात के कई जिलों और उत्तरी हिस्सों में यूपी-बिहार वालों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हुईं थी।

कई हिन्दी भाषी प्रवासियों पर हमले किये गये जिनमें से ज्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश के थे। इस वजह से बड़ी संख्या में प्रवासियों को गुजरात से पलायन करना पड़ा। लेकिन अब भी राज्य में उत्तर भारतीयों पर हमले थमे नहीं है।

दरअसल, गुजरात के वडोदरा में लुंगी पहनने के लिए बिहार के सात लोगों पर कथित रूप से हमले का मामला सामने सामने आया है। बुधवार को तीन लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह हमला शहर के सामा क्षेत्र में सोमवार की रात हुआ था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से द वायर में छपी खबर के मुताबिक, सातों पीड़ित व्यक्ति बिहार के मधुबनी जिला के रहने वाले हैं. इनमें से एक शख्स सिविल इंजीनियर है और बाकी छह लोग प्लंबर हैं। सिविल इंजीनियर शत्रुघन यादव और छह प्लंबर वडोदरा नगर निगम के एक प्राइमरी स्कूल के निर्माण स्थल पर काम करते हैं।

सोमवार को जब यादव और अन्य लोग निर्माणाधीन बिल्डिंग के बाहर बैठे थे, तभी सामा के रहने वाले तीन लोग आए और उनके पहनावे के बारे में पूछने लगे। इस मामले को लेकर स्थानीय और बिहार के लोगों के बीच झड़प हो गई, जिससे सात लोगों को चोटें आईं। इस बीच बाद यादव ने पुलिस को फोन किया और उनसे मदद मांगी।

हालांकि जब तक पुलिस वहां पहुंचती, इतनी तीनों आरोपी भाग गए और धमकी दी कि वे लोग जल्द से जल्द शहर खाली कर दें। गौरतलब है कि, गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी भाषी प्रवासियों पर हाल में हमलों की कई कथित घटनाएं सामने आई हैं।

हालांकि पुलिस ने दावा किया कि सोमवार की रात को हुआ हमला एक अलग घटना है और इसका पीड़ितों के मूल स्थान बिहार से कोई लेना देना नहीं है। घटना के बारे में वडोदरा के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने कहा कि स्थानीय लोगों की बात पर ध्यान नहीं दिये जाने के बाद इन लोगों पर हमला किया गया।

स्थानीय निवासी इन लोगों से लुंगी पहनकर वहां अश्लील तरीके से नहीं बैठने के लिए लगातार कह रहे थे। उन्होंने बताया कि यह घटना हिन्दी भाषी प्रवासियों के खिलाफ ‘घृणा अपराध’ नहीं हो सकती है।

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