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BJP शासित यूपी में पुलिस ने गलत तरीके से आतंकी धाराओं के तहत करीब 200 लोगों पर दर्ज किया मुकदमा, गांव छोड़ भागे मुस्लिम युवक

FIRs on 200 muslims under terrorism section

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली योगी आदित्यनाथ सरकार के राज में सांप्रदायिक माहौल में भी बड़ोतरी हुई है। गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री बनने से पहले हिंदुत्व आतंकवादी संगठन हिंदू युवा वाहिनी की स्थापना करने वाले योगी आदित्यनाथ मुस्लिमों के प्रति उनकी घृणा के लिए जाने जाते हैं।

वहीं, बीजेपी सरकार पर भी यह आरोप लगते रहे हैं कि बीजेपी हिंदुत्व के नाम पर भारतीयों को हिंदू और मुसलमान के रुप में बांटने पर लगी हुई है। ऐसे में हिन्दुत्व की राजनीति करने वालों के शासन में यूपी में शांति कैसे बनी रह सकती है, यहाँ तक की योगी सरकार में कानून व्यवस्था भी लगातार बदतर होती जा रही है।

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के खैर गांव से मुसलमान युवक भाग गए हैं। क्योंकि, यहां पुलिस ने आतंकवाद विरोधी आतंकवादी कानून के तहत उनमें से करीब 200 लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है।

बता दें कि 20 अक्टूबर को धार्मिक जुलूस में हुए एक संघर्ष के मामले में यह केस दर्ज किया गया है। यह बवाल उस वक्त हुआ था, जब दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का जुलूस गांव से गुजर रहा था। यूएपीए एक केंद्रीय कानून है जिसे देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अधिकारियों का अब कहना है कि यूएपीए की धारा में मुकदमा दर्ज करना एक चूक है और इसे एफआईआर से हटा दिया जाएगा।

FIRs on 200 muslims under terrorism section
FIRs on 200 muslims under terrorism section

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, वहीं, खैर गांव में माहौल तनावपूर्ण है। हालात के मद्देनजर पीएसी तैनात की गई है। दुकानें भी बंद हैं और अधिकतर घरों पर ताला लगा हुआ है। बाकी घरों में सिर्फ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे नज़र आते हैं। जो गाँव में रुके हुए हैं। उनमें से अधिकतम का आरोप है कि पुलिस उन्हें परेशान कर रही है।

63 साल की जैतुना ने कहा, ‘मुसलमानों और हिंदुओं के बीच झगड़ा हुआ, लेकिन पुलिस ने केवल हमारे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जुलूस में शामिल लोगों के खिलाफ कोई केस नहीं हुआ, जिन्होंने न केवल पत्थरबाजी की बल्कि हमारे घरों और दुकानों को निशाना बनाया।’

जैतुना के मुताबिक, पुलिस की छापेमारी शुरू होते ही सभी युवकों ने गांव छोड़ दिया और जो लोग नहीं गए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जैतुना के मुताबिक, उनके बेटे रमजान अली (30) और ननकऊ (28) इस वक्त जेल में हैं। जैतुना कहते हैं, घर पर उनके अलावा उनकी दो बहू और 10 पोते-पोतियां साथ रहती हैं।

FIRs on 200 muslims under terrorism section
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रिपोर्ट के मुताबिक, भागने वालों में गांव के पूर्व सरपंच 45 वर्षीय रशीद और खैर बाजार के मुख्य इमाम हफीज अब्दुल बारी भी शामिल हैं। एक पड़ोसी ने बताया, रशीद का परिवार भी भाग गया है। पुलिस ने उनके घरों के दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं, जब महिलाएं और बच्चे अंदर थे।

बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और योगी आदित्यनाथ वहां के मुख्यमंत्री है। मुख्यमंत्री बनने से पहले हिंदुत्व आतंकवादी संगठन हिंदू युवा वाहिनी की स्थापना करने वाले योगी आदित्यनाथ मुस्लिमों के प्रति उनकी घृणा के लिए जाने जाते हैं।

जनसत्ता.कॉम में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अमेरिका के मशहूर अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आतंकी संगठन हिन्दू युवा वाहिनी का सरगना बताया था और लिखा है कि देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में एक ऐसे महंत को शासन करने के लिए चुना गया है जो पहले से ही नफरत भरे बोल बोलता रहा है।

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