DUSU elections 2018 EVM controversy
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गुरूवार (13 सितंबर) को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के चुनाव परिणाम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष समेत तीन पदों पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) को केवल एक पद से संतोष करना पड़ा है।

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, एबीवीपी की अंकिव बसोया ने 1744 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के शक्ति सिंह ने एनएसयूआई की लीना को 7673 मतों के भारी अंतर से हराया। सचिव पद पर एनएसयूआई के आकाश चौधरी ने एबीवीपी के सुधीर डेढ़ा को 6089 वोटों से हराया। जबकि संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी की ज्योति चौधरी विजयी हुईं।

EVM मशीनों को लेकर हंगामा

न्यूज वेबसाइट बोलता यूपी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा और लोकसभा के बाद अब विश्वविद्यालयों के चुनाव में भी ईवीएम पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय में ईवीएम में सिर्फ खराबी नहीं बल्कि हेराफेरी का मामला पकड़ में आया उसके बाद चुनाव आयोग तरह-तरह की सफाई पेश कर रहा है।

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जब चौतरफा आलोचना होने लगी कि ऐसा कैसे हो सकता है जिस पद के लिए DU चुनाव में सिर्फ 8 उम्मीदवार थे और NOTA नौवें नंबर पर था तो फिर 10वें नंबर के विकल्प पर 40 वोट कैसे गए। चौतरफा किरकिरी होता देख, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए तो हमने EVM दिए ही नहीं।

चुनाव आयोग ने कहा- DU को हमने नहीं दी थी EVM मशीनें

चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि डूसू चुनाव कराने के लिए आयोग की तरफ से या राज्य चुनाव आयोग के तरफ से कोई मशीन नहीं दी गई। आयोग का कहना है कि युनिवर्सिटी प्रशासन ने यह मशीनें निजी स्तर पर मंगाई थीं। चुनाव अधिकारी ने साफ किया कि डीयूएसयू चुनाव में इस्तेमाल किए गए ईवीएम को चुनाव आयोग ने नहीं दिया था।

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दिल्ली में मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के द्वारा जारी बयान के अनुसार, ‘डीयूएसयू के चुनावों में कुछ चैनलों द्वारा ईवीएम को लेकर जो लिखा जा रहा है उसके लिए मैं बताना चाहता हूं कि जिन ईवीएम पर सवाल उठाए जा रहे हैं वह चुनाव आयोग के नहीं हैं और इस ऑफिस द्वारा डीयू को ऐसी कोई ईवीएम मशीनें नहीं दी गई थी।’

बता दें कि, चुनाव आयोग के इस बयान के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या चुनाव आयोग के अतिरिक्त भी कोई ईवीएम देने की अथॉरिटी रखता है? और अगर यह ईवीएम आ रहे हैं तो इनकी विश्वसनीयता क्या है? और ऐसी किसी स्वतंत्र कंपनियां एजेंसी से कंप्लीट ईवीएम मिलने का कितना बड़ा खतरा हो सकता है ?

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वहीं, NDTV की एंकर और वरिष्ठ पत्रकार कादंबिनी शर्मा सवाल उठाते हुए लिखती हैं- ‘दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी कहते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए कोई EVM नहीं दिया। सवाल यह है कि फिर यह ईवीएम आए कहां से ? क्या यह विश्वसनीय हैं ?

गौरतलब है कि, अभी तक आरोप लगते रहे हैं कि ईवीएम मशीन के जरिए बीजेपी चुनावी रिजल्ट में हेरफेर करती है। अगर अब छात्रसंघ चुनाव में भी इस तरह की धोखाधड़ी कि मामले सामने आएंगे तब किसी आयोग और मशीनरी पर लोगों का भरोसा कैसे कायम रह पाएगा?