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CBI चीफ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के खिलाफ देशभर में सीबीआई मुख्यालय पर धरना देगी कांग्रेस

Congress protest outside CBI offices across india

देश में जब भी कोई बड़ी घटना होती है तब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की जाती है। लेकिन आज मोदी सरकार में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के अंदर ही छिड़ी जंग ने एजेंसी की विश्वसनीयता और ईमानदारी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सीबीआई में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार ने रातों रात सीबीआई के इन दोनों बड़े अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया है।

RAKESH-ASTHANA-PM-NARENDRA-MODI-AND-ALOK-VERMA
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साथ ही सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है। राव की नियुक्ति होते ही राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच कर रहे सीबीआई के 13 अधिकारियों का भी तबादला कर दिया गया।

वहीं, सरकार के इस फैसले के बाद विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर हमलावर है। विरोधी दल इसे अलोकतांत्रिक बता रहे हैं क्योंकि बिना चीफ जस्टिस और विपक्षी नेताओं के सलाह के प्रधानमंत्री अकेले ऐसे फैसले नहीं ले सकते हैं।

खास तौर पर सीबीआई चीफ़ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। गौरतलब है कि, आलोक वर्मा कई हाईप्रोफाइल केस की जांच कर रहे थे। जिनमें से एक राफेल फाइटर डील था। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आलोक वर्मा जल्द ही फैसला लेने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही मोदी सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया।

हालांकि आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट आने वाले शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करेगा।

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वहीं, कांग्रेस ने इस मामले को सीधे राफेल डील से जोड़ दिया है। राहुल गांधी ने बुधवार (24 अक्टूबर) को ट्वीट कर लिखा है, “CBI चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया। प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है जो भी राफेल के इर्द गिर्द आएगा- हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा। देश और संविधान खतरे में हैं।”

Congress protest outside CBI offices across india

इस मामले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि मोदी सरकार ने सीबीआई की आजादी में आखिरी कील ठोक दी है अब सीबीआई का व्यवस्थित विध्वंस और बदनामी अब पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अलोक वर्मा नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या मामले में सख्ती बरत रहे थे। इसलिए मोदी सरकार ने उन्हें हटा दिया।

इतना ही नहीं, सीबीआई चीफ़ को छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ कांग्रेस शुक्रवार को देशभर में सीबीआई मुख्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक को छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ कांग्रेस शुक्रवार को दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय और राज्यों की राजधानियों में सीबीआई के कार्यालयों के सामने धरना- प्रदर्शन करेगी।

राजधानी दिल्ली में इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी सीबीआई निदेशक के खिलाफ आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे प्रकरण पर देश से माफी मांगने की मांग करेगी।

subramanian swamy
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सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी आलोक वर्मा का समर्थन करते हुए सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि, मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ मिस्टर वर्मा एक निष्पक्ष अधिकारी हैं। उन्हें क्यों हटाया गया मुझे नहीं पता, वो एक ईमानदार व्यक्ति हैं।

वहीं, एनडीटीवी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ प्रशांत भूषण ने कहा कि ‘सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को गलत तरीके से हटाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था कि सीबीआई डायरेक्टर का टर्म दो साल के लिए फिक्स होगा और सिर्फ सेलेक्शन कमेटी ही सीबीआई डायरेक्टर को हटा सकता है। हमारी याचिका संभवत: कल तक दायर हो जाएगी।’ बता दें कि, प्रशांत भूषण गुरुवार (25 अक्टूबर) को इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर करेंगे।

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