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मोदी सरकार गरीबों को नहीं देना चाहती बिजली, 3 साल में 82 हजार करोड़ रुपए घटाई गई बिजली सब्सिडी

Central Govt reduced energy subsidies

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आम जनता के लिए हमेशा से ही बिजली और पानी एक बड़ा मुद्दा रहा है। बिजली कनेक्षण और इसकी कीमतों को लेकर कई बार आम जनता आवाज उठाते हुए सड़कों पर नज़र आती है। हालांकि साल 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव इस समस्या से बेहद प्रभावित हुआ था।

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लेकिन जनता को अब फिर से देश में इस समस्या का सामना करना पढ़ सकता है, क्योंकि केंद्र व मोदी सरकार लगातार बिजली बनाने और उसके वितरण के लिए दी जा रही सब्सिडी घटा रही है।

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दरअसल, टरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल एनर्जी (आईआईओएस), ओवरसीज़ डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (ओडीई) और आईसीएफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 से 2016 के बीच केंद्र सरकार ने बिजली बनाने और वितरण में दी जा रही सब्सिडी को 82 हज़ार करोड़ घटा दिया है। इन तीन सालों में 38% सब्सिडी घटा दी गई है।

2013 में 2 लाख 17 हज़ार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही थी जबकि 2016 में ये घटकर एक लाख 35 हज़ार करोड़ ही रह गई है।

गौरतलब है कि वर्तमान समय में आम जनता देश में रोजगार जैसे बड़ी समस्या से जूझ रही है। मोदी सरकार तीन सालों में अब तक ठीक से रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाई है, वहीं अब बिजली जैसी मूलभूत ज़रूरत को लगातार महंगा कर रही है।

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बता दें कि सरकारी आकड़ों से पता चला है कि देश में अभी भी 30 करोड़ लोग बिजली की सुविधा नहीं मिल पाई है। बिजली के बढ़ते दामों का असर उद्योग पर भी पड़ता है। खासकर वो छोटे उद्योग या कारखानें जो छोटे शहरों में चलते हैं। इससे इनमें बनने वाली वस्तुएं महंगी होती हैं जिसका भार आखिर में आम नागरिक के जेब पर पढ़ता है।

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