India

मोदी सरकार गरीबों को नहीं देना चाहती बिजली, 3 साल में 82 हजार करोड़ रुपए घटाई गई बिजली सब्सिडी

Central Govt reduced energy subsidies

Central Govt reduced energy subsidies

Subscribe to our Hindi TRN

आम जनता के लिए हमेशा से ही बिजली और पानी एक बड़ा मुद्दा रहा है। बिजली कनेक्षण और इसकी कीमतों को लेकर कई बार आम जनता आवाज उठाते हुए सड़कों पर नज़र आती है। हालांकि साल 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव इस समस्या से बेहद प्रभावित हुआ था।

जुड़ें हिंदी TRN से

लेकिन जनता को अब फिर से देश में इस समस्या का सामना करना पढ़ सकता है, क्योंकि केंद्र व मोदी सरकार लगातार बिजली बनाने और उसके वितरण के लिए दी जा रही सब्सिडी घटा रही है।

ये खबर भी पढ़ें  रिटेल महंगाई: अक्टूबर में बढ़कर 3.58% , 7 महीने का उच्चतम स्तर

दरअसल, टरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल एनर्जी (आईआईओएस), ओवरसीज़ डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (ओडीई) और आईसीएफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 से 2016 के बीच केंद्र सरकार ने बिजली बनाने और वितरण में दी जा रही सब्सिडी को 82 हज़ार करोड़ घटा दिया है। इन तीन सालों में 38% सब्सिडी घटा दी गई है।

2013 में 2 लाख 17 हज़ार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही थी जबकि 2016 में ये घटकर एक लाख 35 हज़ार करोड़ ही रह गई है।

गौरतलब है कि वर्तमान समय में आम जनता देश में रोजगार जैसे बड़ी समस्या से जूझ रही है। मोदी सरकार तीन सालों में अब तक ठीक से रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाई है, वहीं अब बिजली जैसी मूलभूत ज़रूरत को लगातार महंगा कर रही है।

ये खबर भी पढ़ें  सीएम केजरीवाल ने मोदी सरकार को सत्ता से हटा ने की ली प्रतिज्ञा, जानिए क्या कहा?

बता दें कि सरकारी आकड़ों से पता चला है कि देश में अभी भी 30 करोड़ लोग बिजली की सुविधा नहीं मिल पाई है। बिजली के बढ़ते दामों का असर उद्योग पर भी पड़ता है। खासकर वो छोटे उद्योग या कारखानें जो छोटे शहरों में चलते हैं। इससे इनमें बनने वाली वस्तुएं महंगी होती हैं जिसका भार आखिर में आम नागरिक के जेब पर पढ़ता है।

Share this story with your friends, the truth needs to be told.

You could follow TR News posts either via our Facebook page or by following us on Twitter or by subscribing to our E-mail updates.

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

To Top