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“अब तक सरकारें लोगों को CBI से डराती थीं, ये पहला मौका है जब सरकार खुद CBI से डरी हुई है”- अखिलेश

CBI row

देश में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार के शासन में ऐसी घटनाएँ हो रही है जो 70 सालों में पहले कभी नहीं हुई। इस समय देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी  केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) खुद भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों को लेकर सवालों के घेरे में है। बता दें कि भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सीबीआई के अंदर ही दो सीनियर अधिकारियों ने एक दूसरे पर भष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले साल के शुरुवात में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जस्टिस देश के इतिहास में पहली बार मीडिया के सामने आए। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र को खतरे में बताया था। साथ ही जजों कि नियुक्ति के मामले में सरकार के हस्तक्षेप को लेकर चिंता जताई थी।

वहीं सीबीआई में मजे घमासान के बीच हस्तक्षेप को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। दरअसल, सरकार ने सीबीआई में जारी जंग के बीच रातों रात अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है।

सरकार का यह फ़ैसला हैरान कर देने वाला है। विरोधी दल मोदी सरकार के इस फैसले को अलोकतांत्रिक बता रहे हैं क्योंकि बिना चीफ जस्टिस और विपक्षी नेताओं के सलाह के प्रधानमंत्री अकेले ऐसे फैसले नहीं ले सकते हैं। खास तौर पर सीबीआई चीफ़ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

गौरतलब है कि, आलोक वर्मा कई हाईप्रोफाइल केस की जांच कर रहे थे। जिनमें से एक राफेल फाइटर डील था। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आलोक वर्मा जल्द ही फैसला लेने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही मोदी सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया।

कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह फैसला “राफेल फोबिया” के कारण लिया गया, क्योंकि वह (आलोक वर्मा) राफेल विमान सौदे से जुड़े कागजात एकत्र कर रहे थे। कांग्रेस ने सीबीआई के निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने को एजेंसी की स्वतंत्रता खत्म करने की अंतिम कवायद बताया है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला तेज करते हुए कहा कि उन्होंने आधी रात को घबराकर वर्मा को इसलिए हटा दिया क्योंकि वह विवादास्पद राफेल सौदे में जांच शुरू करने वाले थे जो कि मोदी के लिए ‘आत्मघाती’ साबित होता।

उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई प्रमुख की शक्ति छीनना ‘अवैध, आपराधिक, असंवैधानिक’ है और यह प्रधान न्यायाधीश, विपक्ष के नेता, भारत के लोगों का अपमान है क्योंकि सीबीआई निदेशक को प्रधानमंत्री की तीन सदस्यीय समिति की मंजूरी के बिना हटाया या नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल स्पष्ट मामला है, जिस समय सीबीआई जांच शुरू होगी, प्रधानमंत्री बर्बाद हो जाएंगे। जांच की इजाजत देना प्रधानमंत्री के लिए आत्मघाती कदम होगा। इसलिए इससे बचने के लिए उन्होंने सीबीआई प्रमुख को हटा दिया। उन्हें दोबारा बहाल करने की लड़ाई चल रही है। आपको इस प्रकरण को नोटिस करना होगा। प्रधानमंत्री ने एक भी शब्द नहीं बोला है।”

इस बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीबीआई को लेकर जारी घमासान पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज सका है। अखिलेश ने ट्वीट कर लिखा है, “अब तक सरकारें लोगों को CBI से डराती थीं, ये पहला मौका है जब सरकार खुद CBI से डरी हुई है।”

गौरतलब है कि, विपक्षी दल ही नहीं बल्कि CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने पर बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी अपनी ही सरकार पर निशाना साधा है। स्वामी ने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि आलोक वर्मा जैसे एक ईमानदार व्यक्ति को शिफ्ट कर दिया गया है। पी चिदंबरम के खिलाफ आलोक वर्मा ने काफी साफ-सुथरी जांच करवाई थी। दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के तौर पर उनका काम अच्छा था।” साथ ही उन्होंने ट्वीट कर कहा की मोदी सरकार भ्रष्टाचरियों को बचा रही है।

उधर, केंद्र सरकार ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे ‘अपरिहार्य’ बताया। सरकार ने दलील दी है कि सीबीआई के संस्थागत स्वरूप को बरकरार रखने के लिये यह कार्रवाई जरूरी थी।

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