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बेटी को कंधे पे लेकर गरीब अब्दुल पेन बेंच रहे हैं, असल कहानी सलाम ठोकने वाली है

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दुनिया : अब्दुल नामक एक सीरियाई शरणार्थी की इस तस्वीर ने सबको बेचैन कर दिया है. हालात के आगे बेबस अब्दुल अपनी लाडली बेटी को कभी कंधे पर तो कभी गोद में लेकर गली गली घूम कर पेन बेचने को मजबूर है. अब्दुल ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसे इस तरह की तंगहाली का सामना करना पड़ेगा कि गर्मी की भरी दुपहरी में उसे बेटी को गोद में लेकर पेन बेच कर पेट भरने की नौबत आ जाएगी ।

जब अब्दुल बेटी को लेकर गलियों में पेन बेचने के लिए भटक रहा था, उसी दौरान किसी स्थानीय पत्रकार ने उनकी तस्वीरें खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और उसकी मदद की अपील कर दी. दुनिया भर के लोगों का दिल पसीज गया और उसे 1 लाख 90 हजार डॉलर की मदद दी. भारतीय मुद्रा के अनुसार ये करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की रकम होती है.

अब्दुल की दरियादिली देखिए कि उसने इस पैसे का इस्तेमाल अपने लिए नहीं बल्कि समूचे शरणार्थियों के लिए किया. सबसे पहले इन पैसों से अब्दुल ने अपना व्यापार शुरु किया और सभी शरणार्थियों की मदद शुरु कर दी. इनमें से कईयों को अब्दुल ने अपने यहां नौकरी भी दी. आज अब्दुल बेहतरीन जिंदगी गुजार रहे हैं और दूसरों की जिंदगी सुधारने के लिए भी कोशिश कर रहे हैं.

दुनिया में कितना गम है, फिर भी मेरा गम कितना कम है. अमीरी गरीबी इंसान की जिंदगी में लगा रहता है. कई लोग गरीबी से तंग आकर अपने आत्मसम्मान को गिरवी रख भीख मांगने लगते हैं तो कईयों को आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाना पड़ता है. कभी सोच कर देखिए, उन अभागों की जिंदगी पर , जिन्हें अपना गांव, अपनी मिट्टी और अपना वतन छोड़ कर भीख मांग कर जिंदगी जीना पड़ता है ।

सीरिया एक मुस्लिम देश है. इस देश में 2011 से ही गृह युद्ध चल रहा है. इस वजह से वहां के निर्दोष और मासूम नागरिकों की जिंदगी में उथल पुथल मची हुई है. इस राजनीतिक उथल पुथल की वजह से सीरिया के लाखों नागरिकों को अपना घर छोड़ कर दूसरे मुल्कों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है. अब शरण तो उन्होंने दूसरे देशों में ले ली है लेकिन बिना कुछ काम किए वो अपने और अपने बच्चों का पेट कैसे भरें. ये एक बड़ी व्यथा सीरिया के शरणार्थियों की सामने आई है ।

सीरिया के शरणार्थियों की एक ऐसी ही कहानी और तस्वीर वायरल हो रही है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है. सीरिया से जारी नरसंहार के खूनी मंजर के बीच यहां के लोग जिन दूसरे देशों में पनाह ले रहे हैं, उनमें से लेबनान का बेरुत शहर सबसे प्रमुख है ।

मजबूरी का आलम है कि ये लोग शहर की सड़कों पर ही अपनी रात गुजारने को मजबूर हैं. कहीं कहीं छोटी मोटी मजदूरी कर दो पैसे का इंतजाम कर रहे हैं ।

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