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लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की कोशिश, अनिल अंबानी के रिलायंस ने NDTV पर किया 10,000 करोड़ रुपये का मुकदमा

Anil Ambani files 10000 cr defamation case on NDTV

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। यही वजह है कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। लेकिन मौजूदा वक्त में भारतीय मीडिया दो टुकड़ों में बटा हुआ नजर आ रहा है।

एक तरफ भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा गोदी मीडिया हो चुका है। जो सत्ता की गोदी में जाकर बैठ गया है। गोदी मीडिया हर हाल में सरकार के हित में रिपोर्टिंग करता नज़र आता है फिर चाहे वह गलत ही क्यों न हो।

गौरतलब  है कि, एक जिम्मेदारी पत्रकार का काम होता है आम जनता की आवाज बनना, उनकी समस्याओं को सामने लाना और सरकार से सवाल करना। लेकिन गोदी मीडिया के पत्रकार जनता की नहीं सत्ता की आवाज होते हैं।

वहीं, दूसरी तरह कुछ मीडिया ऐसे भी जिन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के महत्व को बाकी रखने का काम किया है और सरकार के दबाव में न आकर बेबाक तरीके से अपनी रिपोर्टिंग करके सच को जनता के सामने रख रहे हैं। लेकिन आज इन स्वतंत्र मीडिया की आवाज को भी दबाने के काम बड़े ज़ोरों से किया जा रहा है।

ndtv
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दरअसल, उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने अहमदाबाद की एक अदालत में निजी समाचार चैनल NDTV पर 10 हजार करोड़ रुपये का मुकदमा किया है

यह मुकदबा राफेल विमान सौदों पर एनडीवीटी की रिपोर्टिंग को लेकर किया गया है। गौरतलब है कि, पिछले काफी समय से राफेल सौदा चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष राफेल डील को महा घोटाला करार दे चुका है।

इस डील को लेकर अब तक कई सनसनीखेज खुलासे हो चुके हैं। जिन्होंने मोदी सरकार और अनिल अंबानी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

खबर के मुताबिक,  इस मामले पर सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। उधर, एनडीटीवी ने कहा है कि अनिल अंबानी की कंपनी दबाव बनाकर मीडिया को उसका काम करने से रोक रही है।

Rafale
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Anil Ambani files 10000 cr defamation case on NDTV

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह केस एनडीटीवी के साप्ताहिक शो Truth vs Hype पर किया गया है जो 29 सितंबर को प्रसारित हुआ। रिलायंस के आला अधिकारियों से बार-बार, लगातार और लिखित अनुरोध किया गया कि वे कार्यक्रम में शामिल हों या उस बात पर प्रतिक्रिया दें जिस पर भारत में ही नहीं फ्रांस में भी बड़े पैमाने पर चर्चा हो रही है- कि क्या अनिल अंबानी के रिलायंस को पारदर्शी तौर पर उस सौदे में दसॉ के साझेदार के तौर पर चुना गया जिसमें भारत को 36 लड़ाकू विमान ख़रीदने हैं- लेकिन उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ किया।

एनडीटीवी का आरोप है कि अनिल अंबानी समूह द्वारा तथ्यों को दबाने और मीडिया को अपना काम करने से रोकने की जबरन कोशिश है। एक रक्षा सौदे के बारे में सवाल पूछने और उनके जवाब चाहने का काम, जो बड़े जनहित का काम है। आपको बता दें कि कार्यक्रम के प्रसारण से कुछ ही दिन पहले, रिलायंस की भूमिका पर किसी और ने नहीं, फ्रांस्वा ओलांद ने सवाल खड़े किए थे जो सौदे के समय फ्रांस के राष्ट्रपति थे।

PM Modi with Anil Ambani
PM Modi with Anil Ambani

चैनल का कहना है कि एनडीटीवी के कार्यक्रम में सभी पक्षों को रखा गया। चूंकि रिलायंस का सौदा भारत में बड़ी ख़बर बन चुका है, इसलिए रिलायंस समूह नोटिस पर नोटिस दिए जा रहा है।

उन तथ्यों की अनदेखी करते हुए जिनकी ख़बर सिर्फ एनडीटीवी पर ही नहीं, हर जगह दी जा रही है, जाली और ओछे आरोपों में गुजरात की एक अदालत में एक न्यूज़ कंपनी पर 10,000 करोड़ रुपए का मुक़दमा मीडिया को अपना काम करने से रोकने के लिए दी गई असभ्य चेतावनी की तरह देखा जा सकता है।

एनडीटीवी ने मानहानि के आरोपों को खारिज किया है। चैनल का कहना है कि वह अपने पक्ष के समर्थन में अदालत में सामग्री पेश करेगा। एक समाचार-संगठन के तौर पर, हम ऐसी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सच को सामने लाती है।

बता दें कि, राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार के फैसले पर उठाए जा रहे सवालों के बीच देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से बिना नोटिस जारी किए इसकी खरीद के फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है।

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