मां गंगा को दिया चौकीदार मोदी ने धोखा, फंड से की कमाई और अब फिर से ठगने की कोशिश

नई दिल्ली: ‘न मुझे किसी ने भेजा है, और न मैं यहां आया हूं. मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है.’ ये ‘जुमला’ किसने और कब कहा था, शायद ये बताने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है.

आज मां गंगा का ये बेटा खुद को चौकीदार बता रहा है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि फिर से अपनी मां गंगा के लिए क्या वायदे करता है. फिलहाल बीजेपी के संकल्प पत्र में इस मां का ज़िक्र बहुत ज़्यादा नहीं है. बस इतना ही कहा गया है कि स्वच्छ गंगा का लक्ष्य 2022 में हासिल कर लिया जाएगा.

बता दें कि गंगा सफ़ाई के लिए कैबिनेट मंत्रालय बनाकर ‘नमामि गंगे’ नाम का मिशन चलाने वाली सरकार मां गंगा को अब तक सिर्फ़ धोखा देती ही नज़र आ रही है. जबकि गंगा नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40% आबादी इसी गंगा पर निर्भर है.

मां गंगा की सफ़ाई को लेकर सरकारी दावे

राज्‍यसभा में कपिल सिब्बल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण एवं मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डा. सत्‍यपाल सिंह ने 11 फ़रवरी, 2019 को बताया कि ‘नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत, गंगा नदी की सफ़ाई के लिए कई समन्‍वित कार्य शुरु किए गए हैं. सीवरेज अवसंरचना, औद्योगिक प्रदूषण उपशमन, घाटों का निर्माण और मोक्षधामों का विकास, नदी तट विकास, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण, जैव उपचार, ग्रामीण स्‍वच्छता, अनुसंधान एवं विकास, संचार एवं जन पहुंच कार्यक्रम आदि जैसे क्षेत्रों में अब तक 261 परियोजनाएं मंज़ूर की गई हैं जिनकी अनुमानित लागत 25563.48 करोड़ रुपये है. इनमें से 76 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं और शेष परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं.’

वहीं इसी दिन राज्‍यसभा में डा. अभिषेक सिंघवी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया कि अब तक 261 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं जिनकी अनुमानित लागत 25563.48 करोड़ रुपये है. इन 261 परियोजनाओं में से 136 परियोजनाएं सीवरेज अवसंरचना और सीवेज परिशोधन क्षमता के सृजन द्वारा गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की सफ़ाई के लिए मंज़ूर की गई हैं जिनकी अनुमानित लागत 20623.13 करोड़ रुपये है. इसके अलावा, गंगा के किनारे स्‍थित गांवों में तरल अपशिष्‍ट प्रबंधन परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन के लिए 123.96 करोड़ रुपये दिए गए हैं. 

लेकिन कैग खोल रही सरकार की पोल

अब इन सरकारी दावों से अलग सच्चाई ये है कि नमामि गंगे कोष का लगभग 25,00 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं हुआ है. इसकी जानकारी किसी और ने नहीं, बल्कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी एक ऑडिट रिपोर्ट में दी है. कैग ने केन्द्र सरकार के प्रमुख नमामि गंगे कार्यक्रम में पिछले तीन साल के दौरान वित्तीय प्रबंधन, योजना और क्रियान्वयन में ख़ामियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के पास क्रमश: 2,133.68 करोड़ रुपये, 422.13 करोड़ रुपये तथा 59.28 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं हो पाया है. स्वच्छ गंगा कोष के पास 31 मार्च, 2017 तक 198.14 करोड़ रुपये का कोष था, जिसका इस्तेमाल एनएमसीजी द्वारा नहीं किया जा सका और पूरी राशि बैंकों में कार्रवाई योजना को अंतिम रूप नहीं दिए जाने के कारण बेकार पड़ी रही.

गंगा हुई और भी मैली, 58% बैक्टीरिया बढ़े

मीडिया में आए रिपोर्टस बताती हैं कि मोदी सरकार के समय में गंगा और मैली हुई है और 58% बैक्टीरिया बढ़े हैं. ये रिपोर्ट इंडिया टूडे ने प्रकाशित की है. इंडिया टुडे को गंगा पुनरूद्धार मंत्रालय से आरटीआई के ज़रिए मिले जवाब बताते हैं कि घाटों के किनारे गंगा के पानी में विष्ठा कोलिफॉर्म बैक्टीरिया का दूषण 58 फ़ीसदी बढ़ गया है.

मां गंगा और उनके भक्तों को धोखा देकर सरकार ने की कमाई

केन्द्र की मोदी सरकार न सिर्फ़ करोड़ों रुपए आम आदमी से गंगा के नाम पर दान के तौर पर ले रही है, बल्कि उसे खर्च न करते हुए साल दर साल उस पैसे पर भारी ब्याज भी कमा रही है. सरकार पोस्ट ऑफ़िस के ज़रिए गंगाजल को बेचकर भी कमाई कर रही है. इन बातों की पोल हाल के दिनों में आरटीआई से हासिल दस्तावेज़ों के आधार पर लिखी गई किताब “वादा-फ़रामोशी” में खोली गई है. इस किताब को आरटीआई कार्यकर्ता संजॉय बासु, नीरज कुमार और शशि शेखर ने मिलकर लिखा है.

जल संसाधन मंत्रालय से आरटीआई के ज़रिए हासिल महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बताते हैं कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत ‘क्लीन गंगा फंड’ में 15 अक्टूबर 2018 तक इस फंड में ब्याज समेत 266.94 करोड़ रुपए जमा हो गए थे. वहीं मार्च 2014 में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के खाते में जितना भी अनुदान और विदेशी लोन के तौर पर रुपए जमा थे उस पर 7 करोड़ 64 लाख रुपए का ब्याज सरकार को मिला. मार्च 2017 में इस खाते में आई ब्याज की रक़म बढ़कर 107 करोड़ हो गई. 

इन आरटीआई कार्यकर्ताओं की मानें तो सरकार ने अकेले नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के खाते से 100 करोड़ रुपए का ब्याज कमा लिया. इसका अर्थ यह है कि अनुदान मिलने के बाद पैसे के इस्तेमाल में देरी हुई और इस कारण खाते में ब्याज बढ़ता चला गया.

इतना ही नहीं, आरटीआई से मिले दस्तावेज़ों के मुताबिक़ सरकार ने पोस्ट ऑफिस के ज़रिए गंगाजल बेचकर दो साल में 52.36 लाख रुपए से अधिक कमाए हैं. यह कमाई क़रीब 119 पोस्टल सर्कल और डिवीज़न के ज़रिए 2016-17 और 2017-18 में 200 और 500 मिलीलीटर की 2.65 लाख से ज़्यादा बोतलें बेचकर की गई.

मां गंगा रह गई मैली, लेकिन चौकीदार ने बढ़ाई अपनी चमक

आरटीआई से हासिल दस्तावेज़ बताते हैं कि 2014-15 से 2018-19 के बीच प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में गंगा से संबंधित जारी हुए विज्ञापनों पर 36.47 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. साल दर साल विज्ञापन पर खर्च बढ़ता चला गया. 2014-15 में विज्ञापन पर 2.04 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. 2015-16 में यह राशि 3.34 करोड़, 2016-17 में 6.79 करोड़, 2017-18 में 11.07 करोड़ और चुनावी साल आते-आते केवल आठ महीनों में विज्ञापन की रक़म बढ़कर 13 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गई. यानी मां गंगा भले ही मैली रह गई हैं, लेकिन इस मां को राजनीतिक प्रचार का ज़रिया ज़रूर बनाया गया.

याद रहे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा था —“अगर हम गंगा को साफ़ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फ़ीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी. अतः गंगा की सफ़ाई एक आर्थिक एजेंडा भी है.” और तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ये कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि मां गंगा को धोखा देकर सरकार ने सिर्फ़ अपने आर्थिक एजेंडे पर ही ध्यान दिया है.

यूपीएससी में 30 मुस्लिमों का चयन, जुनैद अहमद को मिली तीसरी रैंक

नई दिल्ली : सिविल सेवा परीक्षा 2018 के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएट हुए कनिष्क कटारिया ने टॉप किया है, वहीं दूसरे नंबर पर अक्षत जैन हैं। तीसरे नंबर पर जुनैद अहमद का नाम आया है।

शुक्रवार की शाम जारी इस नतीजे में 759 उम्मीदवारों के नाम सरकारी सेवा के लिए भेजे गए हैं। वहीं 109 उम्मीदवारों के नाम वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। कुल 1994 उम्मीदवार इंटरव्यू में शामिल हुए थे। इस बार के नतीजों में एक बार फिर सेज़कात फाउंडेशनका जलवा देखने को मिला है। यहां के 18 मुस्लिम लड़के-लड़कियों ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस और आईपीएस बनने का रास्ता साफ कर लिया है। वहीं ज़कात के सहयोग से यूपीएससी की तैयारी करने वाले यूपी के जुनैद अहमद ने आल इंडिया में तीसरी रैंक पाई है।

यूपीएससी के मेन्स एग्जाम में ज़कात के 27 मुस्लिम और दो क्रिश्चियन युवाओं ने कामयाबी हासिल की थी। जिसमे से 18 लड़के और 2 लड़कियों ने ये परीक्षा पास की है। इंटरव्यू पास कर आईएएस बनने वालों में एक क्रिश्चियन युवक भी है।
ये वो 18 लड़के-लड़कियां हैं जिन्होंने ज़कात की मदद से यूपीएससी की तैयारी की थी।

Successful Muslim Candidates for UPSC Result-2018

S.No.NameRanks
1.JUNAID AHMAD3
2.MOHD ABDUL SHAHID57
3.GAUHAR HASAN137
4.AMBUL SAMAIYA140
5.SHAFQAT AMNA186
6.REHANA BASHIR187
7.SHAIKH MOHD ZAIB ZAKIR225
8.SAYYED RIYAJ AHEMAD261
9.BUSHARA BANO277
10.MD JAWED HUSSAIN280
11.MIRZA QADIR BAIG336
12.BABAR ALI CHAGATTA364
13.RENA JAMIL380
14.MUHAMMAD SAJAD P390
15.SHAHZAD ALAM398
16.FARASH T421
17.MUHAMMED ABDUL JALEEL434
18.MOHAMMAD HASHIM448
19.SHAHID AHMED475
20.MD SARFARAZ ALAM488
21.AYMAN JAMAL499
22.ARSHI AADIL520
23.ANSARI ZAID AHMED SAEED AHMED522
24.ALI ABOOBACKER T T533
25.FAISAL KHAN546
26.BASHA MOHAMMED B565
27.MD TAUSIF ULLAH597
28.JITHIN RAHMAN605
29.MOHAMMED MUSTAFA AEJAZ613
30.MD SHAHID RAZA KHAN751

गौरतलब  है कि जक़ात फाउंडेशन जक़ात (दान) के पैसों से चलता है। हालांकि पिछली बार ज़कात फाउंडेशन की ओर से कामयाब होने वाले युवाओं की संख्या 26 थी। लेकिन इस बार ये संख्या घटकर 18 पर रह गई है। इसके पीछे की वजह बताते हुए ज़कात फाउंडेशन के अध्यक्ष डाक्टर सैय्यद जफर महमूद ने बताया, इस बार यूपीएससी ने सीटों की संख्या घटा दी थी।

इस बार मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ़ 30 रही है। यानी कुल उम्मीदवारों में 3.95 फ़ीसद मुस्लिम उम्मीदवार सिविल सर्विस में चुने गए हैं। जबकि पिछले साल 2017 के रिजल्ट में 990 में 52 मुस्लिम उम्मीदवारों का चयन हुआ था। जबकि इसके पिछले साल सिविल सेवा परीक्षा 2016 के नतीजों में 1099 में 50 मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम आए थे। यानी साल 2017 में 5.25 प्रतिशत तो वहीं साल 2016 में ये प्रतिशत 4.55 रहा है।

हमारी लड़ाई सीधे तौर पर गिरिराज सिंह से है ,तनवीर हसन से नहीं है: कन्हैया कुमार

पटना: आरोप प्रत्यारोप और अटकलों के बीच आज कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया ने पटना में प्रेस कांफ्रेंस कर के साफ़ कर दिया की बहुचर्चित युवा नेता कन्हैया कुमार ही बेगुसराय से यूनाइटेड लेफ्ट के प्रत्याशी होंगे, यहाँ से साफ़ हो जाता है की बिहार का बेगुसराय सीट लोकसभा चुनाव के लिए बहुत ख़ास होने वाला है. बता दें की भाजपा ने वहां से अपने फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह  को बेगुसराय का टिकट दिया है.

कन्हैया कुमार ने कहा की जहाँ हमारी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी वह हम महागठबंधन का साथ देंगे. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में ये भी कहा की देश बचाने  के लिए हम हमेशा विपक्ष के साथ संसद से लेकर सड़क तक रहेंगे लेकिन इसका ये मतलब नहीं है की हम किसी के इगो की पूर्ती करने के लिए भाजपा विरोधी मतों को बटने देंगे.

कन्हैया कुमार ने अपने प्रतिद्वंदी गिरिराज सिंह पर हल्ला बोलते हुए कहा की हमें तो पता ही नहीं चला की वो देश में किसी मंत्री पद पर भी थे, मुझे तो लगा वो पाकिस्तान के वीजा मंत्री हैं. उन्होंने आगे कहा की गिरिराज सिंह खुद बेगुसराय नहीं आना चाहते है इसीलिए उनके नखरे दिल्ली में चल रहे है ऐसे नेता को बेगुसराय की जनता क्या अपनाएगी जो खुद बेगुसराय को नहीं अपनाना चाह रहे हों.

भाजपा पर हमला करते हुए श्री कन्हैया ने कहा की हमारा मुकाबला किसी पार्टी या किसी नेता से नहीं है हम लोकतंत्र को बचाने  के लिए, देश के संविधान को बचाने के लिए साथ आयें, क्योँ की भाजपा के नेता खुद बोल चुके हैं की अगर इस बार नरेन्द्र मोदी जीत कर आये तो चुनाव ही नहीं होगा.

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कन्हैया ने कहा की हमारी लड़ाई तेजस्वी से नहीं, हम सामाजिक न्याय के लिए कई बार मंच साझा कर चुके हैं, और आगे भी जब भी जरूरत होगी साथ आएंगे और मिल कर लड़ेंगे. उन्होंने ये भी कहा की महागठबंधन के साथ उनका गठबंधन हो या न हो बेगुसराय की जनता के साथ उनका गठबंधन हो चूका है.

तनवीर हसन पर सवाल पूछे जाने पर कन्हैया कुमार ने कहा की उनका मुकाबला तनवीर हसन से है ही नहीं उनका मुकाबला भाजपा के नफरत और हिन्दू मुस्लिम वाले बयां देने के लिए प्रख्यात गिरिराज सिंह से है.

भारत की इस अकेली सीट पर EVM से नहीं बल्कि बैलेट पेपर से पड़ेंगे वोट, ये है कारण

देश के लोकसभा चुनाव चल रहे है, फ़िलहाल पहले दौर का मतदान जल्द ही होने वाला हैं. वहीं कुछ चरणों के लिए उम्मीदवारों का नामांकन दाखिल करने का दौर जारी है. जैसा की आप जानते है कि काफी समय से देश भर में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इस बार लोकसभा की एक सीट पर ईवीएम का उपयोग हो पाना मुश्किल नजर आया रहा है.

EVM की शुरुआत के बाद से यह पहला मौका होगा जब किसी सीट पर ईवीएम उपयोग नहीं की जाएगी. इस बार तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर EVM का प्रयोग नहीं किया जाएगा. यहां पर चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराया जाएगा.

दरअसल इसका कारण है कि इस बार तेलंगाना की इस सीट से 185 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं. अगले महीने होने वाले चुनावों में भाग लेने वालों में उम्मीदवारों में ज्यादातर किसान हैं. वहीं आपको बता दें कि फ़िलहाल इस सीट पर तेलंगाना के सीएम और TRS चीफ के. चंद्रशेखर राव की बेटी कल्वकुंतला कविता का कब्जा है.

वह इस बार फिर से इस सीट को जीतने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रही है. इस सीट पर नाम वापस लेने की तारीख गुरुवार तक ही थी. तारीख की समाप्ति के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी रजत कुमार ने बताया कि इस सीट पर 185 उम्मीदवार मैदान में होंगे जिनमें से 178 किसान हैं.

इन किसानों में से ज्यादातर हल्दी और लाल ज्वार की खेती करते हैं. इन्होंने प्रशासन का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए इतनी बड़ी संख्या में नामांकन दाखिल किये है. जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सके. इन किसानों को खासकर कृषि मजदूरी के भुगतान संबंधी समस्या है.

आपको बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा 64 उम्मीदवारों के लिए ही किया जा सकता है. ऐसे में जहां पर उम्मीदवारों की तादात को देखते हुए चुनाव अधिकारियों का कहना है कि निजामाबाद में इस बार चुनाव बैलट पेपर के जरिए ही चुनाव कराए जाएंगे.

निजामाबाद सीट के बारे में मुख्य चुनाव अधिकारी रजत कुमार ने कहा कि इस सीट पर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएगें लेकिन फ़िलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह बातचीत के दौर में ही है. इसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करेगा.

बीजेपी उम्‍मीदवार पर भड़की स्‍वरा भास्‍कर ट्वीट कर कहा- पढ़-लिख लो संघियों..

लोकसभा चुनाव 2019 की जंग के लिए सियासी चाले चली जाने लगी हैं. सभी पार्टियां अपने दमदार दावेदार के साथ मैदान में उतर रही हैं. इसी कड़ी में बीजेपी ने दक्षिण बेंगलुरु से 28 वर्षीय तेजस्वी सूर्या को अपना उम्मीदवार बनाया है. पेशे से तेजस्वी सूर्या कर्नाटक हाईकोर्ट में एक वकील हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सूर्या हमारी राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम के सदस्य और पार्टी प्रदेश युवा मोर्चा के सचिव भी हैं. कहा जा रहा है कि सूर्या बासावानगुडी विधानसभा से विधायक एल.ए. रविसुब्रमण्यन के भतीजे हैं. सूर्या ने बेंगलुरु के इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से पढ़ाई की है.

सूर्या टिकट के मिलने के बाद काफी उत्साहित दिखे उन्होंने ट्विटर पर किये अपने एक ट्वीट में लिखा कि हे भगवान! मुझे यकीन नहीं हो रहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के पीएम और सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष ने इस प्रतिष्ठित सीट के लिए मुझ पर भरोसा जताया है.

Chowkidar tejasvi surya

आपको बता दें कि यहां से बीजेपी के सांसद रहे दिवंगत अनंत कुमार की पत्नी टिकट की प्रबल दावेदार दी लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया है. तेजस्वी सूर्या को लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया में उनके कुछ पुराने ट्वीट्स रिट्वीट होने लगे.

फिल्म एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने उनका एक ऐसा ही ट्वीट रीट्वीट किया जो वायरल होने लगा हैं. दरअसल यह ट्वीट 6 साल पुराना 19 दिसंबर 2013 का है. तब इस ट्वीट में तेजस्वी सूर्या ने लिखा था कि शिक्षा से मैं एक अंग्रेज हूं, विचारों से अंतर्राष्ट्रवादी, कल्चर से मुसलमान और हिंदू सिर्फ दुर्घटनावश जन्म से- जवाहर लाल नेहरू.

Swara Bhasker

इसे ट्वीट को रिट्वीट करते हुए स्वरा भास्कर ने लिखा कि कितनी बार एक ही स्टेटमेंट का फैक्ट चेक करें यार. ये बयान किसी और का नहीं बल्कि 1959 में हिंदू महासभा के नेता एनबी खरे का है. इसके साथ ही लगे हाथ उन्होंने सूर्या को पढ़ लिखने की सलाह देते हुए कहा कि पढ़ लिख लो संघियों.

रवीश कुमार: ‘लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने के लिए चांद देखिए जनाब’

इस बीच आई पी एल मैच के उद्घाटन को 21 करोड़ 90 लाख लोगों ने देखा है। पिछली बार के उद्घाटन मैच की तुलना में 31 प्रतिशत दर्शक अधिक आए हैं, उसका कारण यह है कि हिन्दी जगत में टीवी का विस्तार 30 प्रतिशत हुआ है। राजनीति में जो लोग गोदी मीडिया के चैनलों के असर को कम समझते हैं उन्हें इस डेटा को देखना चाहिए। नए इलाके में टीवी के साथ न्यूज़ चैनल भी पहुंचे हैं। पहली बार दर्शक बन रहे लोगों के ब्रेन वॉश का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

बिजनेस स्टैंडर्ड की श्रीमि चौधरी ने लिखा है कि CBDT (central board of direct taxes) ने आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भेजी है। लिखा है कि हालात बेहद गंभीर हैं। इस बार यानी 2018-19 के बजट में प्रत्यक्ष कर की वसूली का लक्ष्य 12 लाख करोड़ रखा गया था मगर अब जब इस वित्त वर्ष की समाप्ति में मात्र चार दिन रह गए हैं, वसूली अपने लक्ष्य से दो लाख करोड़ पीछे है। अभी तक 10.29 लाख करोड़ आयकर ही जमा हो सका है। इसके पहले वित्त वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत अधिक वसूली हुई है मगर बजट में तय किए गए लक्ष्य से अभी काफी पीछे है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ख़बर है कि भारत सरकार एलपीजी और केरोसीन की सब्सिडी का भुगतान नहीं कर पाएगी। अखबार के संवाददाता सौरभ कुमार ने लिखा है कि मार्च तक भारत सरकार को 32,000 करोड़ का भुगतान करना है। सरकार अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को कम करने के लिए ऐसा कर रही है। उसे दोनों का मिलाकर 36,500 करोड़ का भुगतान करना है। पेट्रोलियम मंत्रालय को 48,000 रुपये चाहिए थे मगर अभी तक 16,500 करोड़ ही मिले हैं। ज़ाहिर है सरकार के पास पैसा नहीं है। पैसा क्यों नहीं है, कहां गया?

बिजनेस स्टैंडर्ड ने जीएसटी के बारे में लिखा है कि जीएसटी को लेकर भी जो लक्ष्य तय किए गए हैं वो पूरे नहीं हो सके हैं। हर महीने एक लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया था। 2018-19 के बीच सिर्फ तीन बार ही एक लाख करोड़ की वसूली हो सकी है। जीएसटी से भी टैक्स चोरी नहीं रूकी है। आज के ही जागरण में खबर छपी है कि 70 कंपनियां फर्ज़ी बनाकर 238 करोड़ की टैक्स चोरी की गई है। 22 मई 2018 की खबर बिजनेस टुडे में छपी है। इसके अनुसार फर्ज़ी बिल बनाकर 450 करोड़ के इनपुट टैक्स वसूले गए हैं यानी चोरी हुई है। 14 नवंबर 2018 की ख़बर है कि कर्नाटक में 20 फर्ज़ी कंपनियां बनाकर जीएसटी फ्राड किया गया है। 1200 करोड़ की टैक्स चोरी हुई है। 27 जनवरी 2019 की खबर एनडीटीवी पर है। इसके अनुसार अहमदाबाद के 29 साल के एक नौजवान ने 66 फर्ज़ी कंपनियां बना ली थीं, इसके ज़रिए उसने 177 करोड़ टैक्स चोरी का जुगाड़ किया था। 18 जनवरी 2019 को वडोदरा से एक टैक्स कंस्लटेंट को गिरप्तार किया गया था जिसने बोगस बिल बनाकर 582 करोड़ की कर चोरी का प्रयास किया था।

सरकार ज़रूर कर चोरी को पकड़ रही है मगर जीएसटी को लेकर वादा किया गया था कि कर चोरी रुक जाएगी। टैक्स चोरी करना नामुमकिन हो जाएगा। फर्ज़ी कंपनी बनाने का सिलसिला जारी है। न मालूम कितनी कंपनियां बनाकर कर चोरी की जा चुकी होगी। क्या जीएसटी के बाद भी सब कुछ वैसा ही चल रहा है। ज़रूर 3000 करोड़ से अधिक की कर चोरी पकड़ी गई है मगर यह खबर परेशान करने वाली है कि टैक्स चोरी हो रह है।

इसका मतलब है कि टैक्स चोरी करने वाला सिस्टम बरकरार है। अधिकारी बताते हैं कि फर्ज़ी बिल वाला स्कैम बहुत ज़्यादा बढ़ चुका है। भारत भर में बड़े पैमाने पर पकड़ा जा रहा है। जो पकड़े जाते हैं उसके बाद भी दूसरे चैनल से वही लोग फर्ज़ी बिल बनाने का नया जुगाड़ ले आते हैं। यानी कि जीएसटी आने से करप्शन और चोरी रूकने का दावा कमज़ोर पड़ चुका है।

इंडियन एक्सप्रेस के हरीश दामोदरन ने लिखा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले पांच साल में हर तरह से कमाई घटी है। फसलों की कीमत कम हुई है और मज़दूरी घटी है। हरीश दामोदरन ने अपने लेख का अंत एक सवाल से किया है। क्या इसके कारण किसान चुनावों में मोदी को वोट नहीं करेंगे? वे लिखते हैं कि यूपीए-2 के समय फसलों की कीमत भी बढ़ी थी और वास्तविक मज़दूरी भी लेकिन किसानों ने कांग्रेस को वोट नहीं किया था। तो इसका मतलब यह हुआ कि किसान संकट में है, कोई ज़रूरी नहीं है कि इसके कारण मोदी का भविष्य संकट में है।

जेट एयरवेज़ का सकंट सुलझा नहीं है। यहां 15000 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। सैलरी बढ़ नहीं रही है। घट रही है। लोग निकाले जा रहे हैं। दोषी प्रबंधन ही है मगर 15000 कर्मचारियों का जीवन प्रभावित होने जा रहा है। एयरवेज़ भारत का सफलतम सेक्टर था मगर इस सेक्टर के कई ब्रांड कमज़ोर हुए हैं। जहाज़ ज़मीन पर खड़े हैं। कम जहाज़ उड़ने के कारण यात्री ज़्यादा किराया दे रहे हैं। पिछले दिनों भारत में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ी है मगर इसके बाद भी यह सेक्टर संकट में क्यों आया। बिजनेस स्टैंडर्ड में धीरज नैय्यर ने लिखा है कि दुनिया भर में इस सेक्टर में संकट है। अमरीका में 100 विमान कंपनियां दीवालिया होने के कगार पर हैं। धीरज ने भारत में सरकार की नीतियों को बड़ा कारण बताया है। जिसके कारण इस सेक्टर की लागत बढ़ गई है।

भारत में हवाई जहाज़ के ईंधन पर टैक्स बहुत ज़्यादा है। लागत का एक तिहाई ईंधन पर ही ख़र्च होता है। जब दुनिया के बाज़ार में ईंधन महंगा हो तब सरकार को अपना टैक्स घटाना चाहिए था। एक तरफ सरकार एयरपोर्ट के विकास को लेकर दावे करती है दूसरी तरफ धीरज नैय्यर लिखते हैं कि भारतीय एविएशन सेक्टर के संकट का कारण यह है कि एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास तेज़ गति से नहीं हुआ है। कम लागत वाले विमानों के लिए दुनिया भर में अलग एयरपोर्ट होते हैं भारत में दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू में इनका विकास नहीं हो सका है। भारत में सभी एयरलाइन को ज़्यादा फीस देकर मुख्य एयरपोर्ट का ही इस्तमाल करना पड़ता है। धीरज नैय्यर वेदांता कंपनी के मुख्य अर्थशास्त्री हैं।

चुनावी भीड़ से निकल कर अर्थव्यवस्था को समझते रहिए। किसी सरकार को पंसद नापसंद करने के लिए नहीं बल्कि अपनी समझ के विस्तार के लिए। हिन्दी के अख़बारों ने तय कर लिया है कि वे हिन्दी के पाठकों की हत्या करके रहेंगे। उन्हें इतना मूर्ख बनाकर रखना है ताकि कोई नेता आए और प्रचार माध्यमों के सहारे उल्लू बना कर निकल जाए। हिन्दी अख़बारों को पढ़ते वक्त सतर्क रहने की ज़रूरत है। न्यूज़ चैनलों का हाल तो आप जानते ही हैं।

बिहार में कन्हैया कुमार नहीं होंगे महागठबंधन के उम्मीदवार

बिहार में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर आज अहम एलान हो गया। समझौते के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल 20 और कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी पांच, हम तीन और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) भी तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राजद ने अपने कोटे से सीपीआई-एमएल को एक सीट दी है। शरद यादव राजद के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। उनकी पार्टी का विलय भी जल्द राजद में हो जाएगा।

मनोज झा ने कहा कि तेजस्वी यादव और गठबंधन के दूसरे बड़े नेता बाद में प्रेस से बात करेंगे.

राजद प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्व ने सीटों की घोषणा करते हुए कहा कि राजद 20, कांग्रेस 9, आरएलएसपी 5, हम 3, वीआईपी 3 सीटों पर लड़ेंगे.

आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा हैं जो हाल तक बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए का हिस्सा थे और केंद्रीय राज्य मंत्री थे. पिछले साल एनडीए छोड़कर उन्होंने बिहार के महागठबंधन का हिस्सा बनने का फ़ैसला किया था.

एनडीए में 2014 में उन्हें तीन सीटें मिली थीं लेकिन इस बार महागठबंधन ने उन्हें पांच सीटें दी हैं. उन्हें कौन सी पांच सीटें मिली हैं अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है.

राजद कोटा से सीपीआई(माले) को एक सीट दी गई है. लेकिन ये साफ़ नहीं है कि माले को कौन सी सीट दी गई है.

इससे ये भी साफ़ हो गया है कि सीपीआई इस गठबंधन में शामिल नहीं है यानी अब कन्हैया कुमार को गठबंधन से टिकट नहीं मिलेगा.

सीपीआई के बिहार प्रदेश सचिव सत्यनारायण सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सीपीआई को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है लेकिन कन्हैया कुमार उनकी पार्टी की तरफ़ से बेगुसराय से चुनाव लड़ेंगे.

कन्हैया कुमार की तरफ़ से फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है.

11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम की भी घोषणा कर दी गई है.

गया से जीतन राम मांझी, नवादा से राजद की विभा देवी, जमुई से आरएलएसपी के भूदेव चौधरी, औरंगााबाद से हम के उपेंद्र प्रसाद चुनाव लड़ेंगे.

एबीपी न्यूज़ के बाद अब सूर्य समाचार से भी निकाले गए पुण्य प्रसून बाजपाई, किया बड़ा खुलासा

2 महीने में ही वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेई को सूर्य टीवी से निकाल दिया गया

पुण्य प्रसून वाजपेई और अभिसार शर्मा के एबीपी न्यूज़ से निकाले जाने के बाद कई महीनों तक सोशल मीडिया पर दोनों के लिए फैंस ने अभियान चलाया था दोनों को मीडिया हाउस से निकाले जाने के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना रहा।

अचानक पुण्य प्रसून बाजपाई ने सूर्य टीवी जॉइन किया सूर्या टीवी प्रियागोल्ड बिस्किट वालों का न्यूज़ चैनल है जिसके बाद लगातार सूर्या टीवी ने लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दी और देखते ही देखते मात्र 6000 फेसबुक पेज वाले सूर्य टीवी के लाखों की ओर होते चले गए।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी के दो महीने के अंदर ही सूर्या समाचार से रुखसत होने की खबर जहां आज मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है,।

ऐसे में वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम ने फेसबुक पर एक पोस्ट से जरिेए बताया है कि सूर्या समााचार का मालिकान किस तरह का है और उन्हें क्यों प्रसून की रुखसत वाली खबर पर हैरानी नहीं हुआ। पढें अजीत अंजम का पोस्ट

मुझे हैरत तो उस दिन हुई थी, जिस दिन प्रसून बाजपेयी ने सूर्या समाचार जॉइन किया था। आज बिल्कुल हैरान नहीं ,जब जाना कि प्रसून पूरी टीम के साथ वहां से रुखसत हो रहे हैं।

जिस आदमी से 20 मिनट की मुलाकात बाद ही मैं चाय तक छोड़कर उठ गया था कि आपके साथ न मैं चाय पी सकता हूँ न ही एक दिन भी काम कर सकता, उस आदमी की कंपनी में प्रसून चले कैसे गए? हैरानी इस बात पर हुई थी।

मेरी मुलाकात डेढ़ साल पहले हुई थी। नहीं चाहते हुए भी किसी के बहुत अनुरोध पर मिलने गया था। पहले मिनट में ही मैंने तय कर लिया कि यहां तो काम किसी सूरत में नहीं करना है। 15 मिनट बाद ‘लाला जी’ जी की चाय आई। चाय सामने रखते हुए उन्होंने कहा- ‘देखो जी, हम तो हर रोज की चाय का भी हिसाब रखते हैं। मुझे पता होता है कि आज कितनी चाय बनी ‘।

तभी मैं ये कहते हुए उठ खड़ा हुआ कि आप किसी वक्त के मारे को खोजिए, जो आपके साथ काम कर सके। आप चाय का हिसाब रखिए और बिस्किट के साइज पर रिसर्च करते रहिए। मेरे जैसा आदमी एक घंटा आपके साथ काम नहीं कर सकता।
लाला जी को हक्का बक्का छोड़ मैं तेजी से बाहर निकल गया।

बाद में सुना कि कई संपादक आए और गए।. हैरान उस दिन हुआ जब प्रसून गए।

ये बात अगस्त 2017 की है। मैंने एक सुबह ताव में आकर इंडिया टीवी से इस्तीफ़ा दे दिया था और कुछ दिन ब्रेक पर रहने का मन बना चुका था। तीसरे ही दिन एक आदमी का फ़ोन आया कि आपसे आज ही मिलना है। देर रात को वो मेरे घर आए। प्रिया गोल्ड बिस्किट के मालिक का महिमा मंडन करने के बाद मेरे सामने उनका गर्भस्थ चैनल को लाँच करने का ऑफ़र रखा। मैंने साफ़ मना कर दिया तो कहने लगे कि एक बार कल ही आप चैयरमैन साहब से मिल लीजिए। फिर जो फ़ैसला करना हो करिए। मैंने उनके ऑफ़िस जाने से इनकार किया। तब मेरी बताई जगह पर मीटिंग तय हुई।

लाला जी मिलते ही कहने लगे मेरे ऑफ़िस ही चलिए। आराम से बात करेंगे। शिष्टाचार में मैं उनके साथ चला गया, लेकिन बातों से ही पता चल गया कि उनकी मंशा क्या है। मैं चाहता तो लाखों की मोटी और मुंहमांगी रक़म लेकर दो-चार -छह महीने गुज़ार देता, जैसे कुछ बड़े पत्रकार-संपादक करते हैं, लेकिन मेरा ताव मुझे ऐसा करने नहीं देता है।

बाद में लाला जी से इस एनकाउंटर के बारे में मैंने कई दोस्तों को बताया। कुछ ने ये भी कहा कि आपको इतना ब्लंट नहीं होना चाहिए था। मैंने हमेशा यही कहा कि वो आदमी ऐसा ही ब्लंट जवाब डिजर्व करता था।

पुण्य प्रसून वाजपेई ने भी अपने सोशल मीडिया के टि्वटर हैंडल पर निकाले जाने की खबर को चंद अल्फाजों में लिखा है पुण्य प्रसून वाजपेई ने लिखा कि ढाई सौ करोड़ की डील जय हिंद।

व्यापारियों ने चीनी सामान की जलाई होली, करोड़ों का माल जलकर राख दूसरी और SBI का BANK OF CHINA के साथ समझौता

नई दिल्ली: चीन के खिलाफ व्यापारियों के संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आवाहन पर दिल्ली सहित देश भर के विभिन्न राज्यों में व्यापारी संगठनो ने 1500 से अधिक स्थानों पर चीनी सामानों की होली जलाई गई. बता दें कि व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चौथी बार मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने पर वीटो का उपयोग करने को ध्यान में रखकर किया गया.

प्रर्दशनकारी व्यापारी अपने हाथों में पत्तियां लिए हुए थे जिन पर लिखा था ” भारत को सोने की चिड़िया बनाना है – अब चीन को बाजार से हटाना है “, ” पाक समर्थक चीन को सबक-चीनी सामान का बहिष्कार “, ” चीन से बने सामान को खरीदना या बेचना – अपने जवानों का उत्साह कम करना “, “चीनी सामान का बहिष्कार -तोड़ेगा चीन की आर्थिक कमर ” जैसे पट्टियों द्वारा अपने रोष और आक्रोश का प्रदर्शन कर रहे थे .

वहीं दूसरी और देश के सबसे बड़े बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने Bank of China (बैंक ऑफ चाइना)के साथ करार किया है. बैंक की ओर जारी बयान में कहा गया है कि इस समझौते से एसबीआई तथा बीओसी दोनों को संबंधित बाजारों में सीधी पहुंच का फायदा होगा. एसबीआई की एक शाखा शंघाई में है जबकि बैंक ऑफ चाइना मुंबई में अपनी शाखा खोल रही है.

एसबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से व्यापार अवसरों को बढ़ावा देने के लिये बैंक आफ चाइना के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि एसबीआई ने बैंक आफ चाइना के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये.

इसका मकसद दोनों बैंकों के बीच व्यापार में तालमेल बढ़ाना है. पूंजी आकार के मामले में बैंक आफ चाइना (बीओसी) दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बैंक जबकि चीन के प्रमुख बैंकों में से एक है.

आजतक:डिबेट में युवक ने BJP प्रवक्‍ता से कहा- देश को प्रधानमंत्री चाहिए, चौकीदार नहीं; वीडियो वायरल

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर एक न्यूज चैनल पर कराए जा रहे डिबेट के दौरान युवक ने बीजेपी प्रवक्ता से कहा कि देश को प्रधानमंत्री चाहिए, चौकीदार नहीं। डिबेट का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स वायरल हो रहे वीडियो पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं।आज तक’ चैनल पर टीवी डिबेट के दौरान युवक ने कहा, “पहले आप पकौड़े बेचने की बात कहते हैं और फिर कहते हैं चौकीदार। चौकीदार तो हम नेपाल से सस्ता और अच्छा ले आएंगे। देश को प्रधानमंत्री की जरूरत है। और दूसरी बात ये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि मेरे जन्म होने से पहले ये देश सांप-सपेरों का था। मैं प्रधानमंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जब उनका जन्म हुआ तब हम भाभा परीक्षण केंद्र बनवा चुके थे। जब वे गिल्ली-डंडा खेलते थे, तब हम भाखड़ा-नांगल डैम बना चुके थे। देश का विकास कीजिए।”

#MainBhiChowkidar Kya jawab diya hai.. subko sunaye aur share kare.

Kanhaiya Kumar Speech ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಮಾರ್ಚ್ 17, 2019

एक यूजर ने लिखा, “ऐसे लाखों पढ़ें लिखे बच्चे हैं जो सच जानते हैं, झूठे चौकीदारों को जवाब देंगे 2019 के चुनाव में अपनें ‘वोट’ से! जय हिन्द”। एक अन्य ने लिखा, “बच्चे, अब TV डिबेट के प्रश्नकर्ता को भी आप सीरियसली लेने लग गए?”इसी तरह एक और यूजर ने लिखा, “देश समझ रहा है और अब बदल भी रहा है। सच्चाई को छुपाना आसान नहीं। सत्य तो सूर्य जैसा स्वच्छ होता है वो हमेशा प्रकाश देता है। जय हिन्द।”

युवक की बात सुन वहां मौजूद लोग ताली बजाने लगे। युवक की बात पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि जिस संदर्भ में प्रधानमंत्री जी ने वो बात कही है, वो इन्हें समझ में नहीं आया। जो विकास पिछले पांच सालों में हुआ है, उसको आप नकार नहीं सकते हैं। बैंकिंग सेक्टर से लोगों को जोड़ा गया। देश के एक लाख करोड़ बचाए। लोगों को मुफ्त में गैस कनेक्शन दिया गया। लोगों का घर बनवाया गया।”